उच्च शिक्षाः महाविद्यालयों का होगा कायाकल्प, हंस फाउण्डेशन करेगा मदद

उच्च शिक्षाः महाविद्यालयों का होगा कायाकल्प, हंस फाउण्डेशन करेगा मदद

कालेजों को 50 लाख दिये जाने पर बनी सहमतिः डा० धन सिंह

देहरादून। राज्य के 12 राजकीय महाविद्यालयों में हंस फाउण्डेशन की मदद से चिह्नित मूलभूत सुविधाएं दी जायेंगी। इसके लिए हंस फाउण्डेशन प्रत्येक महाविद्यालय को रूपये 50-50 लाख तक की धनराशि प्रदान करेगा। यह जानकारी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा० धन सिंह रावत ने गुरूवार को कैम्प कार्यालय में हंस फाउण्डेशन के प्रतिनिधियों साथ हुई बैठक के उपरांत दी।

स्मार्ट क्लास और आधुनिक उपकरणों से लैस होंगे महाविद्यालय

डा० रावत ने बताया कि इस योजना के तहत सूबे के एक दर्जन ऐसे राजकीय महाविद्यालयों को शामिल किया गया है जो कि भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना रूसा के वित्तीय सहयोग से वंचित रह गये थे। चयनित महाविद्यालयों में हंस फाउण्डेशन की ओर से कम्प्यूटर, पुस्तकालय हेतु पुस्तक, ई-बोर्ड, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला उपकरण, फर्नीचर आदि की सुविधाओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जायेगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग को प्रत्येक महाविद्यालयों की आवश्यकतानुसार एक निर्धारित फार्मेट पर प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र हंस फाउण्डेशन को उपलब्ध कराना होगा।

रुसा से वंचित महाविद्यालयों को मदद करेगा हंस फाउण्डेशन

हंस फाउण्डेशन के तहत वित्त पोषण हेतु राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर, डोईवाला, चम्पावत, रानीखेत तथा राजकीय महाविद्यालय पाबौ, सितारगंज, बड़कोट, कोटद्वार भाबर, थलीसैण, गैरसैण, चौबट्टाखाल और कर्णप्रयाग को शामिल किया गया है। हंस फाउण्डेशन के सेक्शन हेड विकास वर्मा ने बताया कि धनराशि खर्च करने के उपरान्त उच्च शिक्षा विभाग को उपयोग प्रमाण पत्र के साथ ही आॅडिट रिपोर्ट भी संस्था को मुहैया करानी होगी ताकि व्यय धनराशि का दुरूपयोग न हो सके।

विभागीय मंत्री ने बताया कि इसके अलावा 59 राजकीय महाविद्यालयों में रूसा तथा शेष राजकीय महाविद्यालयों में राज्य सेक्टर से बजट उपलब्ध कराया गया है। जिसके तहत प्रदेश के सभी 105 राजकीय महाविद्यालयों में पठन-पाठन के स्तर को बेहतर बनाने के लिए 14 मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा सके। बैठक में सलाहकार रूसा प्रो० एमएसएम रावत, प्रो० के०डी० पुरोहित, नोडल अधिकारी रूसा डा०. ए०एस०उनियाल, हंस फाउण्डेशन के सेक्शन हेड विकास वर्मा, पंकज भट्ट आदि उपस्थित रहे।

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