देहरादून। शुक्रवार को राष्ट्रीय किसान मोर्चा और भारत मुक्ति मोर्चा के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने किसान विरोधी कानून को लेकर राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक शेखर लोबियाल की अगुवाई में डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। राष्ट्रीय किसान मोर्चा ने ज्ञापन में माध्यम से कहा कि केन्द्र सरकार ने पूंजीपतियों के लिए यह कानून बनाया है। राष्ट्रीय किसान मोर्चा इस कानून का विरोध करती है। इसके विरोध में राष्ट्रीय किसान मोर्चा देशभर के 550 जिला मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन कर रही है। राष्ट्रीय मोर्चा के मुताबिक यह कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित किया गया है। किसान राष्ट्रीय मोर्चा के संयोजक शेखर लोबियाल ने कहा कि केन्द्र सरकार किसान मजदूर विरोधी है। लाकडाउन के दौरान मजूदरों के हितों की रक्षा करने वाले 29 कानून केन्द्र सरकार पहले ही समाप्त कर चुकी है और अब उनके निशाने पर देश के किसान है।
इस मौके पर राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के देवप्रयाग प्रभारी कुलदीप सेनवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि कानून बनाया है। इस कानून से सिर्फ पूंजीपतियों का लाभ होगा। यह कानून किसानों के खिलाफ एक साजिश है। इससे से किसान और मजदूर खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस काले कानून का राष्ट्रीय किसान मोर्चा विरोध करती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केन्द्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है केन्द्र सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में आवश्यक वस्तु अधिनियम-2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं के लिए करार के लिए, किसानों का सशक्तिकरण और संरक्षरण कानून-2020 और कृषि उत्पाद एवं व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) कानून-2020 को रद्द करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक शेखर लोबियाल, राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हर्षपति, बहुजन एकता के उत्तराखण्ड प्रभारी डा० आर०एस०दिवाकर, भारतीय राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के देवप्रयाग विधान सभा प्रभारी कुलदीप सेनवाल, राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के सदस्य मनोज चुरखण्डी, प्रताप राम आगरी, पंचम कु्वर, सय्यद मोहम्मद खालिद, अरविंद शाह समेत बड़ी तादाद में मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
