देहरादून। उत्तराखण्ड जैसे पहाडी राज्य में सेहत का सवाल हमेशा बड़ा मसला रहा है। राज्य बनने के बाद से ही स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाना सरकारों के लिए कठिन चुनौती बनी रही। राज्य के तमाम अस्पतालो में डाक्टर नहीं थे। अस्पताल भवन जर्जर हालत में थे। सरकारी अस्पतालों का ये हाल हो चले थे कि अस्पताल में डाक्टर है तो दवाइयां नहीं है। कहीं लैब है तो तकनीशियन नहीं। डाक्टरों को तो पहाड़ पर चढ़ाना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं रहा। पहले की सरकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करने के लिए लाखों करोड़ों रुपये भी खर्च किए लेकिन सही रीति नीति ना होने के चलते नतीजा सिफर ही रहा।

मौजूदा सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत बीते चार सालों में प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। पहाड़ी राज्य को लेकर सही नीति और फैसलों से प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर चढ़ने लगी है। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बीते चार सालों में प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी में लाने का काम किया है। बात दवा की हो, डाक्टरों की हो या स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे पहलुओं की, सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने हर मोर्चे पर सुधार किया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी वर्षों पुरानी समस्या थी। इस समस्या को सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने तकरीबन सुलझा दिया है। पिछले चार साल के दरमियान प्रदेश सरकार 2400 डाक्टरों की भर्ती कर चुकी है। अब मार्च तक प्रदेश को 750 नए डाक्टर मिलने जा रहे हैं।

राज्य सरकार ने अस्पतालों में नर्सो की कमी को दूर करने का फैसला लिया है। इसके लिए अब प्रदेश सरकार 2500 नए नर्सो की भर्ती में जुट गई। प्रदेश के सभी अस्पतालों में आईसीयू बना दिये गए हैं। ये त्रिवेन्द्र सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। दूरदराज के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने 132 नई एम्बुलेंस मिलने जा रही है।
त्रिवेन्द्र सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हर मोर्चे पर काम कर रही है। पहाड़ी इलाकों और दूरदराज गांव तक स्वास्थ्य सुविधाओं पहुंचाने के लिए सरकार ने कई अस्पतालों को पीपीपी मोड पर चलाने का भी फैसला लिया है। इस कदम से अब प्रदेश की जनता को पहाड़ में ही एक्सपर्ट डाक्टरों की सेवा मिल रही है।

प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए त्रिवेन्द्र सरकार ने देशभर के 2200 बड़े अस्पतालों से टाइ-अप किया है। अब राज्य का कोई भी नागरिक गंभीर रोगों की दशा में देशभर के इन बड़े अस्पतालों में इलाज करा सकता है। ‘अटल आयुष्मान योजना में तो त्रिवेन्द्र सरकार ने रिकार्ड तोड़ काम किया है।
