रुद्रप्रयाग। नारी गांव के रहने वाले राहुल आत्मनिर्भर भारत की मिसाल पेश करते हैं। आज वे गांव में रहकर ही एलईडी बल्ब बनाते है। इस काम में वे गांव के नौजवानों को भी रोजगार दे रहे हैे। राहुल मलवाल ने कई सालों तक अलग अलग शहरों में कम्पनियों व फैक्ट्रियों में कर्मचारी बनकर इलेक्ट्रानिक्स का काम किया।

कोरोना का असर इन पर भी पड़ा और लॉकडाउन के लगने से इनकी भी घर वापसी हो गयी। घर में रहकर विचार आया कि क्यों न यहीं कुछ किया जाये जिससे घर से दूर न जाना पड़े। फिर उन्होंने आरसेटी से 17 दिन की एलईडी बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली। बाद में लोन भी पास हो गया। फिर उन्होंने अपने ही घर में ही स्वयं एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरु किया। साथ में उनकी पत्नी विनीता मलवाल ने ने उनके इस काम में हाथ बटाया। जब काम चलने लगा तो गांव की दो महिलाओं मुन्नी देवी व लक्ष्मी देवी को भी रोजगार दिया। साथ में मार्केटिंग का जिम्मा दिया लक्ष्मण सिंह ने संभाला। आज लक्ष्मण की मदद उनका माल थोक रेट पर बाजारों में बेचा जाता है।

राहुल की इस फैक्ट्री में फिलहाल 5,7,9,12 वाट के बल्ब बनाये जा रहे है, जिनकी कीमत प्रति बल्ब 25 रुपए से 150 रुपये तक है। साथ ही खराब हुए बल्बों को भी रिपेयर किया जाता है। इनकी फर्म का नाम ‘मां चन्डिका पावर लाइट’ है। जो आईएसओ प्रमाणित है। स्वरोजगार की दिशा में उनका कदम सराहनीय है और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेने की जरुरत है और जो महिलायें घास काटने तक सीमित रह गयी थी वो अब बल्ब बना रही हैं।
