देहरादून। चमोली जिले में रविवार सुबह ग्लेशियर टूटने के बाद सरकार राहत और बचाव कार्य में मुस्तैद है। सुबह रैणी गांव के नजदीक ग्लेशयर टूटने धौलीगंगा और ऋषिगंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। जिससे ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना से वहां काम कर रहे मजदूर टनल में फंस गये थे। तथा निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई थी। हादसे की सूचना के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत घटना का जायजा लेने के लिए खुद ग्राउंड जीरो पहंुच चुके हैं। और लगातार राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई है। और लगभग 170 लोगों के लापता होने की सूचना है। लापता सभी लोग ऋषिगंगा और एनटीपीसी पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मजदूर हैं। लगभग 6 लोगों को राहत दल ने रेस्क्यू किया है। बाढ़ से लगभग स्थानीय 5 पुल टूट गये हैं। विष्णुप्रयाग का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। पावर प्रोजेक्ट के टनल में 12 मजदूर फंसे हुए थे जिन्हें रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि पावर प्रोजेक्ट के मैन टनल में अभी 30 मजदूर फंसे हुए हैं जिनके रेस्क्यू के लिए रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास कर रही है।
उत्तराखण्ड सरकार स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। एनडीआरएफ की दो टीम मौके पर पहुंच चुकी हैं। आईटीबीपी की चार टीम जिसमें तकरीबन 400 से अधिक जवान है राहत एवं बचाव में लगी हुई है। एसडीआरएफ की एक अतिरिक्त टीम को हैली द्वारा आपदाग्रस्त क्षेत्र में भेजा गया है। आर्मी की दो टीम को किसी भी आपदा वाली स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया गया है। एयर फोर्स की एक टीम घटना स्थल के लिए रवाना हो गई है।
जोशीमठ में आर्मी हैलीपैड हो सक्रिय गया है। जहां 3 हैलीकाप्टर राहत और बचाव के लिए उपलब्ध हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निचले और मैदानी इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। मेडिकल की दो टीम घटना स्थल पर पहुंच गई है जबकि 2 टीमें को रवाना किया जा चुका है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने जौली ग्रांट में 3 हैलीकाप्टर तैयार कर दिये हैं।
