ब्लैकमैलर के लिए स्वर्ग बना उत्तराखण्ड

ब्लैकमैलर के लिए स्वर्ग बना उत्तराखण्ड

राज्य गठन के बाद से ही उत्तराखण्ड ब्लैकमैलरों के काले साये से जूझ रहा है। अब इन ब्लैकमैलरों के हौसलें इतने बुलंद हो चले हैं, कि ये शासन-प्रशासन को भी कुछ नहीं समझते हैं। अपने ब्लैकमैलिंग के धंधे से इन्होंने इतना रसूख बना लिया है कि अब ये प्रदेश के राजनेताओं और अफसरों से रौब गालिब करने से भी नहीं चूकते।

ये ब्लैकमैलर पत्रकारिता की आड़ में अपने धधें को अंजाम दे रहे हैं। ब्लैमेलरों का ये दल अभी तक उत्तराखण्ड के कई बड़े नेताओं और अफसरों को शिकार बना चुका हैं। इस ब्लैकमेलर दल के सरगना पर उसकी काली करतूत के चलते दर्जनों मुकदमें दर्ज है। पड़ोसी राज्यों में इस सरगना की करतूत के चलते प्रवेश पर प्रतिबंध है।

देहरादून में इन्होने बडी-बडी कोठियां खड़ी कर रखी है। ये कोई बड़ा कारोबार नहीं करते। फिर कुछ ही वर्षों में इनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से आई? ये दरअसल ब्लैकमेंलिग का पैसा है। पहाड के लोगों से लूटा हुआ पैसा है। ये बाहर से आकर यहां काला धंधा कर रहे हैं।

बाहर से आये खुद को स्वयंभू पत्रकार बताने वाला ये ब्लैकमेलर माफिया अब खुद को उत्तराखण्ड का हितैषी बताने लगे है। उत्तराखण्ड के भोलेभाले नौजवानों को अपने चंगुल में फंसा कर ब्लैकमेलिंग के धंधे में उतारने लगे है।

इस ब्लैकमेलर माफिया के कारनामों की लम्बी फेहरिस्त है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो वहां इस माफिया का विधानसभा सचिवालय मे प्रवेश बंद है। पश्चिमी बंगाल के अंदर इसने खेल करने की कोशिश की तो वहां इसका क्या हाल हुआ यह सब जानते हैं। राजस्थान में इसका प्रवेश बंद है। पंजाव में इसे दौडा दौडा कर भगाया गया। दिल्ली के अंदर कोई भी व्यक्ति इसको अपने साथ बिठाने और बात करने को तैयार नहीं।

यह माफिया सरगना दावा करता है कि उसके पास 300 से ज्यादा रिकार्डिंग है। सवाल यह भी कि ये रिकार्डिग कहां से आई? किसने उपलब्ध कराई। ये किसी के सगे नहीं दोस्ती के नाम पर ये किसी को भी बर्बाद करने की कोशिश में रहते हैं। इनका मकसद केवल लूटना है।

जनता के जरिए चुनी सरकारो को अस्थिर करके अपने हित साधते रहे हैं। उत्तराखण्ड में हरीश रावत, डा० रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ भगत सिंह कोश्यारी या मदन बिष्ट और हरक सिंह रावत का किस्सा हो, क्या क्या नहीं किया इस पत्रकार के भेष में छुपे ब्लैकमेलर ने लूटपाट के लिए।

उत्तराखड के लोगों को सोचना चाहिए कि हमेशा लुटते रहना है या ऐसे ब्लैकमेलरों लुटेरों को जवाब भी देना है। आखिर यह उत्तराखंड इतना लुंज पुंज क्यों हो गया? कहां है मातृशक्ति की हुंकार और कहां है युवा? इन ब्लैकमेलरों को उत्तराखण्ड से खडेड़ना चाहिए। बेशक राजनीति में पहाड के लोगों के अलग अलग विचार हो सकते हैं। विचारों के आधार पर अलग-अलग पार्टियां हो सकती है। लेकिन यह हमारी अपनी सोच है। सच यह भी है कि पार्टियां बाद में है लेकिन पहले हम सब उत्तराखंडी है।

उत्तराखण्ड की जनता को इतना तो सजग होना होगा कि कोई माफिया हमारे नेताओं और भोलेभाले नौजवानों को खरीदने की कोशिश न करे। इसके लिए उत्तराखंड के लोगों को खडा होना होगा। हमारे पूर्व सैनिकों को ऐसे माफिया दलालों के खिलाफ खडा होना होगा। नही तो हमारे पूर्वजों का यह उत्तराखंड इन ब्लैकमेलर्स से नहीं बच पायेगा।

ये काले साम्राज्य को फैलाने पूरी ताकत लगाते है। ऐसा माफिया दिखाने के लिए कभी लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री भी भिजवाते हैं और शुभचिंतक बनते हैं। लेकिन यहां के भोले लोग नहीं जानते कि पांच हजार का सामान भेजने वाला दलाल माफिया पांच करोड कब लूट गया पता भी नहीं चलता।

यह माफिया उत्तराखण्ड की नई पीढी को शराब पिलाकर, चिकन खिलाकर बरगलाने की कोशिश करता है। सोशल मीडिया में कमेंट्स पर लाइक शेयर कराने के भी पैसे देता है। यह माफिया किसी झूठ को सौ बार बोलता है ताकि लोगों को उसका झूठ सच जैसा दिखा। बिना सुबूतों को यह माफिया उत्तराखण्ड के राजनेताओं, अफसरों और उद्योगपतियों को डराता है और जनता को गुमराह करता है।

उत्तराखंड के बुद्धिजीवी, पत्रकार लेखक चिंतक सामाजिक कार्यकर्ताओं को सोचना अब इस दिशा में सोचना होगा। आपसी पार्टीबाजी को भुलाकर पहले ऐसे ब्लैकमेलरों माफियाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी। नहीं तो आने वाले समय में हम आपस में ही बात करते हुए घबराएंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *