पहाड़ की जनभावनाएं झलकती है पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र के फैसलों में

पहाड़ की जनभावनाएं झलकती है पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र के फैसलों में

देहरादून। सत्ता में रहते हुए किसी भी सरकार के लिए जनता की उम्मीदें पूरी करना, सबसे बड़ी चुनौती होता है। चार साल पहले जब त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश की कमान संभाली थी तो उनके सामने भी बड़ी चुनौतियों रही। प्रदेश की जनता ने भाजपा को 57 बिधायक दिए। ऐसे में प्रचण्ड बहुमत की सरकार के मुखिया होने के चलते उनकी जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई थी। सत्ता की कमान हाथ लेने के बाद ही वे अपने विरोधियों के निशाने पर रहे। लिहाजा उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान दोहरी चुनौतियांे का सामना करना पड़ा। एक तरफ प्रदेश की जनता जर्नादन की उम्मीदें और दूसरी तरफ उनके विरोधियों के कुटिल चालें। इस रस्साकसी में उन्होंने मुखिया के तौर पर लगभग चार साल का कार्यकाल मिला। लेकिन अंत में उनके विरोधी उन्हें सत्ता से बेदखल करने में सफल हो गये।

त्रिवेन्द्र सिंह रावत को बतौर मुख्यमंत्री लगभग चार साल प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर मिला। इस दौरान उनके कार्यकाल ठोस उपलब्धियों भरा रहा। उन्होंने कई ऐसे फैसले लिये जो उत्तराखण्ड की अवाम की उम्मीदों पर खरे उतरे। साल 2020 पूरी दुनिया के साथ-साथ उत्तराखण्ड में कोरोना जैसी चुनौती सामने आई। जिसका मुकाबला त्रिवेन्द सरकार ने बड़े कुशल तरीके से किया। जिसके चलते प्रदेश में कोविड का असर देश-दुनिया के मुकाबला कम रहा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई

18 मार्च वो दिन है जब चार साल पहले उन्होंने प्रदेश की बागडोर संभाली थी। लिहाजा इस दिन उनके मुख्यमंत्री के तौर पर काम-काज का विश्लेषण जरूरी हो जाता है। त्रिवेन्द्र सिंह रावत वो प्रदेश ऐसे पहले मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उखाड़ने का काम किया। इसके लिए हर स्तर पर फैसले लिये। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टाॅलरेंस की नीति अपनाई। उन्होंने पहली बार प्रदेश में भ्रष्ट आईएएस अधिकारियों के खिलाफ हाइवे घोटाले में लिप्त होने के चलते कानून कार्यवाही अमल में लाई। उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार का पर्याय बने ट्रांसफर उद्योग का खात्मा किया और प्रदेश में पारदर्शी ट्रांसफर एक्ट लाए।

गैरसैण का ऐतिहासिक फैसला

उत्तराखण्ड की जनता गैरसैंण का उत्तराखण्ड की राजधानी चाहती थी। अलग उत्तराखण्ड की मांग करने वाले आंदोलनकारियों ने गैरसैण को राजधानी बनाने का सपना देखा था। लेकिन राज्य बनने के बाद पहले की तमाम सरकारों ने गैरसैण के मसले को हमेशा ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की। सियासी पार्टियों के गैरसैण महज राजनीतिक मुद्दे के सिवा और कुछ नहीं था। लेकिन त्रिवेन्द्र ने बतौर मुख्यमंत्री रहते प्रदेश की जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया।

आधी आबादी के हक के लिए फैसले

त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम काम किये। पति के पैतृक सम्पत्ति में महिलाओं को सह-खातेदार बनाने का फैसला लिया। यह फैसला पूरे देश के लिए एक नजीर बन गया। उन्होंने पहाड़ में खेती-बाड़ी से जुड़ी महिलाओं की दशा और दिशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री घस्यारी योजना की शुरूआत की।

हेल्थ सिस्टम का इलाज

त्रिवेन्द्र सरकार में पटरी से उतरती प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए हर स्तर पर काम किया। पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अस्पतालों को पीपीपी मोड पर दिया। ताकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के जनता को वहीं पर अच्छा इलाज मिल सके। डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगभग 2200 से ज्यादा डाक्टरों की भर्ती की। पैरामैडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने का काम किया। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय के अस्पतालों में आईसीयू यूनिट की स्थापना की। 108 सेवाओं का विस्तार किया ताकि हर जरूरतमंद को अस्पताल में इलाज मिल सके। अटल आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश की जनता को 5 लाख तक इलाज निशुल्क महैया कराने के लिए गोल्डन कार्ड की शुरूआत की। कोरोना से जंग में कुशल प्रबंधन से महामारी को नियंत्रित किया ।

प्रदेश की कनेक्टिविटी की बेहतर

पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र की अगुवाई में प्रदेश में सड़कों के निर्माण में रिकार्ड काम हुआ। प्रदेश के गांव-गांव मोटर मार्ग से जुड़े। पीएम सड़क योजना के तहत पिछले 16 सालों में वो काम नहीं हुए जितने पिछले चार सालों में हुए। प्रदेश में बेहतर हाई सेवाओं का विस्तार किया।

स्वरोजगार के जरिये रोजगार

पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश में पलायन को रोकने और नौजवानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरूआत की। इस योजना के चलते आज प्रदेश में कई नौजवान आत्मनिर्भर होकर विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।

पूर्व सैनिकों का किया ख्याल

उत्तराखण्ड सैनिक बहुत प्रदेश है। यहां हर परिवार किसी ना किसी तरीके से सेना से जुड़ा हुआ है। सैनिकों और सुरक्षा बलों के हित में भी त्रिवेन्द्र सरकार ने ऐतिहासिक काम किये। सैनिकों सम्मान दिलाने के लिए प्रदेश में सैनिक धाम का शिलान्यास किया।

त्रिवेन्द्र सरकार ने बतौर मुखिया रहते प्रदेश में हर वर्ग और हर क्षेत्र के लिए काम किया। संक्षेप में यहां पर उन कार्यों और फैसलों में नजर डालना जरूरी हो जाता है।
● किसानों एवं महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए उन्हें 03 से 05 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करवाना।
● मुख्यमंत्री स्वरोजगार तथा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना।


● प्रदेश भर में ग्रोथ सेंटरों की स्थापना के चलते हर हाथ को काम दिलाने की व्यवस्था।
● सौभाग्य योजना के तहत प्रदेश के 02 लाख 50 हजार से अधिक घर हुए रोशन।
● जल जीवन मिशन के अंतर्गत मात्र ₹1 में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का कनेक्शन। शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए ₹100 में पानी का कनेक्शन।
● सैनिकों का सम्मान, पंचम धाम के रूप में सैन्य धाम का शिलान्यास।
● चार धाम यात्रा को और अधिक सुगम बनाने के लिए देवस्थानम बोर्ड का गठन।
● डिजिटल उत्तराखंड को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा से भारत नेट-2.0 प्रोजेक्ट ने दी गई थी मंजूरी इससे प्रदेश के 12 हजार गांव इंटनेट से जुड़ेंगे।

उनके कुशल कार्य प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के चलते उत्तराखण्ड को इन पिछले चार सालों में राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी हासिल किये। जिससे प्रदेश का देश-दुनिया में मान सम्मान बढ़ा।
ऐसे तमाम कार्य जिनके लिए ईमानदार कार्यशैली वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यकाल को याद किया जाएगा।

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