पूछता है बेबस अभिभावक, फीस एक्ट कब आयेगा सरकार?

पूछता है बेबस अभिभावक, फीस एक्ट कब आयेगा सरकार?

देहरादून। उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डे का प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर चालू सत्र में एक्ट बनाने का बयान मीडिया में सुर्खियों बटोर रहा है। शिक्षा मंत्री ने बयान दिया है कि निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए सरकार जल्द ही फीस एक्ट लागू करेगी। इस एक्ट के बाद निजी स्कूल फीस को लेकर मनमानी नहीं कर सकेंगे।

यह पहला मौका नहीं जब प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए फीस एक्ट को जल्द लागू करने की बात की है। इससे पहले भी कई मर्तबा शिक्षा मंत्री इस पर बयान मीडिया में जारी कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उनका ये फीस एक्ट चार साल बाद भी लागू नहीं हो पाया है।

मीडिया में छपी खबरों पर यदि यकीन करें तो शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डे दिल से फीस एक्ट को लागू करवाने चाहते हैं। लेकिन कभी बेलगाम नौकरशाही इसके आड़े आ जाती है तो कभी चुनाव आचार संहिता। मीडिया की खबरों की मानें तो यदि शिक्षा सचिव आर० मीनाक्षी सुंदरम् मंत्री के आदेशों की नाफरमानी नहीं करते तो 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले फीस एक्ट लागू हो चुका होता और निजी स्कूलों के अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी वसूली से निजात मिल जाती। लेकिन ऐन मौके पर लोक सभा चुनाव के चलते आचार संहिता लग गई।

इसके इतर प्रदेश भर में निजी स्कूलों की मनमानी और फीस की आड़ में अवैध वसूली जारी है। इन दिनों स्कूलों में सालाना परीक्षाएं चल रही हैं। बीते दिनों देहरादून में राजपुर रोड स्थित एक नामी निजी स्कूल ने कुछ बच्चों को परीक्षा देने से रोक दिया क्योंकि उनके अभिभावक समय पर तीन महीने की फीस जमा नहीं कर पाये थे।

निजी स्कूलों की मनमानी का दूसरा मामला देहरादून में शिमला रोड स्थित एक नामी स्कूल का जहां स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने के एवज में जुलाई 2021 तक की फीस वसूली जा रही है।

नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल में शुरू होगा। लेकिन निजी स्कूल ने अभिभावकों से वसूली की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। मसलन अभिभावकों को किताबें खरीदने, ड्रेस खरीदने का फरमान जारी कर दिया है। फरमान भी ये कि अभिभावकों को किताबे या तो स्कूल से खरीदनी है या स्कूल की बताई अधिकृत दुकान से।

इधर भले ही सरकार प्रदेश के सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें स्कूलों में अनिवार्यत लागू किये जाने को उपलब्धियां बता रहा है। लेकिन सरकार के इस फैसले से अभिभावकों के जेब में पड़ने वाला डाका नहीं थमा है। निजी स्कूल अब भी एनसीईआरटी की किताबों के साथ मनमाने तरीके से वर्कबुक और दूसरी किताबे खरीदने के लिए छात्रों और अभिभावकों को मजबूर करते हैं।

बहरहाल अप्रैल में नया सत्र शुरू हो जाएगा। चुनाव आयोग प्रदेश में उपचुनाव की घोषणा कर चुका है 17 अप्रैल को वहां चुनाव होना है। राजनीतिक दल उसकी तैयारियों में जुटे हैं। नये मुख्यमंत्री के जींस वाला बयान सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है। इस सबके बीच बेबस और लाचार अभिभावक फीस एक्ट की नये सत्र में इंतजारी कर रहे हैं।

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