सरकार की योजनाओं की सफलता के लिए उन पर सवाल उठाने जरूरी हैं। लेकिन सवाल योजनाओं को सही ढंग से धरातल पर उतारने व उनके बेहतर क्रियान्वयन के लिए किए जाएं तो तभी जाकर आम जन के हित साधे जा सकेंगे। विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मकता का होना जरूरी ही नहीं बल्कि बहुत जरूरी है।
आइएः यहां बात करते हैं, प्रदेश में लाॅंच हुई राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की। जो गांवों के आखिरी छोर तक पहुंच कर हर उस ग्रामीण की आर्थिकी का आधार बनेगी जो अल्प संसाधनों मंे भी सबलता का सामथ्र्य रखते हैं। यह घर घर में पहुंचकर उन मेहनतकश ग्रामीणों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। बात आखिरी छोर के ग्रामीणों के हित की है तो इस कार्यक्रम की सफलता के लिए हर किसी को पाॅजिटिव होना होगा। आज सूबे की राजधानी में सहकारिता मंत्री डा धन सिंह रावत ने परियोजना के निदेशालय कार्यालय का भी विधिवत शुभारंभ कर दिया है।
सहकारिता मंत्री डा धन सिंह रावत कहते हैं कि पूर्व में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह जी जब सहकारिता के एक कार्यक्रम में देहरादून आए थे, तो तब उन्होंने उनसे यह परियोजना प्रदेश में लागू कराई। कई विभागों के जरिए गांवों तक इसका लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे किसान जो धान और गेहूं पैदा करते हैं, उन्हें घास प्रजाति की मक्का, जई व बरसीन बोने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे में अनाज से ज्यादा पैसा वह इन फसलों से ले सकते हैं। फेयर प्राइस शॉप के माध्यम से जिलों में घास को पहुंचाया जाएगा। यानी फसल के साथ ही घास का भी उत्पादन हमारे कास्तकार कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी ’स्वास्थ्य पशुधन गौरवान्वित महिलाएं’ एवं राज्य के पशुपालकों को पोषण प्रणाली में हो रहे प्रौद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कल्याणकारी योजना ’मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याणी योजना’ भी परियोजना में प्रस्तावित है।
समेकित सहकारी विकास परियोजना का जो खाका खींचा गया है, उसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सूबे के करीब 60 हजार लोगों रोजगार से जोड़ा जाएगा।
यहां परियोजना के मुख्य कार्यक्रम निदेशक डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इसमें डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा साइलेंस पर काम किया जा रहा है। सूबे के गांवों के विकास में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।
मीनाक्षी सुंदरम भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ट अधिकारी हैं और उनकी कार्य प्रणाली व छवि भी प्रसंशनीय रही है। उम्मीद करते हैं कि सहकारिता के क्षेत्र में अपूर्व परिणाम देकर विकास में इसकी अहमियत साबित करने वाले सहकारिता मंत्री और भारतीय प्रशासनिक सेवा के कर्मठ अधिकारी की इस जुगलबंदी के प्रदेश हित में बेहतर नतीजे आएंगे।
यहां कहना होगा कि विकास की दिशा की उठ रहे कदमों पर निगरानी रखी जानी जरूरी है, लेकिन उसके सकारात्मक पक्ष को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उम्मीद करते हैं कि हमारी सकारात्मक सोच इस परियोजना को सफलतम ढंग से आम जनता तक पहुंचाने में सहयोग करेगी।
