देहरादून। सूबे के वन मंत्री और हरक सिंह रावत और सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी इन दिनों विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सैन्य धाम को लेकर बनी उच्चस्तरीय समिति के भंग किये जाने के गणेश जोशी के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना कि सरकार के मंत्री अपनी मनमानी करने में लगे हुए हैं। उन्होंने इसमें प्रोटोकाॅल का रत्तीभर का ख्याल भी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के मंत्री अपनी ही सरकार के फैसले का निरस्त करने में लगी हुई।
उन्होंने कहा कि यह समिति पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत द्वारा गठित की गई थी जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गणेश जोशी का ये कदम अपने ही पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत को नीचा दिखाने के लिए उठाया गया है। दसौनी यह भी कहा कि इसमें कोई दो राय नही कि गणेश जोशी समिति को निरस्त करने के लिए अधिकृत हैं। लेकिन, सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री को अध्यक्ष नामित करने का मंत्री गणेश जोशी को अधिकार आंखिर किसने दे दिया? दसौनी ने कहा कि क्या प्रदेश में गंगा उलटी बहने लगी है?
दसौनी ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहली दफा नहीं जब भाजपा किसी मंत्री ने प्रोटोकाल तोड़ा हो। इससे पहले भी कर्मकार कल्याण बोर्ड में कुछ इसी तरह की अराजकतायंे देखने को मिली। कर्मकार कल्याण बोर्ड में घोटाले की पुष्टि होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष पद से मंत्री हरक सिह को हटा दिया गया था। उसके बाद लगभग 32 अधिकारियों व कर्मचारियों पर घोटाले के आरोप में जांच बैठा दी गई थी।
20 करोड़ रूपये का घोटाला जग जाहिर हुआ था। इस रकम की बाद में बोर्ड ने उगाही भी कर ली थी। कर्मकार बोर्ड की जाॅच अधिकारी षणमुगम को सौंप दी गई थी। रिपोर्ट मंें जांच अधिकारी ने बडे घोटाले की पुष्टि भी की। लेकिन हैरतअंगेज बात यह है कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद ना सिर्फ इस विभाग की जांच रोक दी गई। निलंबित सभी अधिकारी व कर्मचारी जिन पर घोटाले की जाॅच चल रही थी उन सभी को बहाल कर दिया गया। और साथ ही निलंबित किये गये उस तारीख से वेतन भी निर्गत कर दिया गया है।
दसौनी ने कहा कि जब हरक सिंह उस बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिये गये हैं तो फिर लगातार बोर्ड के क्रियाकलाप में उनके दखल का क्या औचित्य है? दसौनी ने सवाल किया आंखिर हरक सिंह को किसका संरक्षण प्राप्त हो रहा है कि वह अपनी मनमानी पर उतर आये हैं।
दसौनी ने मुख्यमंत्री तीरथ रावत से भी प्रश्न किया है कि आंखिर प्रदेश में मंत्रियों द्वारा की जा रही मनमानी देखने के बाद भी मुख्यमत्री मौन क्यों साधे हुए हैं? क्या सिर्फ इस लिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत मूक दर्शक बने हुुए है कि वह अपने विरोध से डरते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द रावत का जैसा हश्र नही चाहते।
