पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का निधन, पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का निधन, पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

देहरादून। चिपको आंदोलन के प्रणेता, हिमालय पुत्र, प्रकृतिप्रेमी, वृक्षमित्र के नाम से विख्यात, जाने माने पर्यावरणविद्,पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा का शुक्रवार को निधन हो गया है। उन्हांेन ऋषिकेश एम्स में आखिरी सांस ली। कोरोना से संक्रमित होने के चलते उन्हें बीती आठ मई को ़ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था। पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का अंतिम संस्कार ऋषिकेश स्थित पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा जी 94 वर्ष के थे। उनका जन्म 1927 में टिहरी में हुआ था। श्री बहुगुणा ने सदैव टिहरी बांध का विरोध किया। उन्होंने जल ,जंगल को संरक्षित करने के लिए लोगों को जागरूक किया। विश्व प्रसि़द्ध चिपको आंदोलन बहुगुणा के नेतृत्व में ही हुआ। उन्होंने सर्वोदय आंदोलन, चिपको आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम में अपना ऐतिहासिक योगदान दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर दुख जताया। ट्वीट के जरिये अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा के निधन देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया। उनकी सादगी और करूणा को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी सुंदरलाल बहुगुणा के निधन में शोक व्यक्त किया। चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। पहाड़ों में जल, जंगल और जमीन के मसलों को अपनी प्राथमिकता में रखने वाले और रियासतों में जनता को उनका हक दिलाने वाले श्री बहुगुणा जी के प्रयास सदैव याद रखे जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज हमने देश के एक बहुमूल्य रत्न को खो दिया।हिमालय की रक्षा और पर्यावरण की सुरक्षा के लक्ष्य को सदैव सर्वोपरि रखने वाले बहुगुणा जी ने सर्वोदय आंदोलन, चिपको आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम में अपना ऐतिहासिक योगदान दिया

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन के प्रणेता, वृक्षमित्र के नाम से विश्वप्रसिद्ध, प्रख्यात पर्यावरणविद्, पद्मविभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। उनका जाना पर्यावरण सहित देश और दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है।

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