ठीक भरी दोपहरी में मेरा गाॅव-मेरी सड़क योजना का कत्ल!

ठीक भरी दोपहरी में मेरा गाॅव-मेरी सड़क योजना का कत्ल!

हरीश रावत इन दिनों लगातार प्रदेश भाजपा सरकार को लगातार निशाने में लिये हुए हैं। इन दिनों वे सोशल मीडिया में खासे सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के जरिये वे उन विकास योजनाओं के बारे में बता रहे हैं जो उनकी सरकार ने शुरू करवाये थे और भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद बंद कर दिए हैं।

हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सम्पर्क बढ़ाने के लिये एक अभिनव योजना शुरू की ‘‘मेरा गाॅव मेरी सड़क’’। इस योजना के तहत थोड़ा गाॅव को उपलब्ध धन का अंशदान लेकर ताकि उनकी भागीदारी बने। राज्य सरकार ने प्रत्येक विकास खण्ड में 3 ऐसी सड़कें प्रतिवर्ष बनाने का निर्णय लिया और आर.ई.एस. को यह दायित्व सौंपा गया।

इस योजना में फॉरेस्ट क्लीयरेंस के झंझट अत्यधिक न्यूनतम थे और गांव के सहयोग से कंपनसेशन का झगड़ा भी नहीं आता था। बस गांव को 1 से लेकर के 3 किलोमीटर तक सड़क बनाकर के दी जाती थी। इस योजना की प्रारम्भिक सफलता को देखते हुये रुजिलापंचायतों ने मुझसे कहा कि हम इन सड़कों को बनाने में योगदान देना चाहते हैं।

मैंने उनके उत्साह को देखते हुये प्रत्येक विकासखण्ड में एक सड़क और जोड़ दी। लगभग डेढ़ साल यह योजना सफलतापूर्वक चली। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने पहला काम इस रुयोजना को बन्द करने का किया।

आज भी ऐसी लगभग 250-300 सड़कें हैं जो इस योजना के तहत बनी हैं और गाॅवों की सेवा कर रही हैं। आज जब मैं देख रहा हॅू कि लोग 1 किलोमीटर, 2 किलोमीटर की सड़क को गाॅव की मुख्य सड़क से जोड़ने के लिये श्रमदान से सड़कें बना रहे हैं।

मैं यद्यपि श्रमदान के पीछे छीपी हुई भावना का बहुत बड़ा प्रशंसक हॅू। उस समय मुझे ‘‘मेरी गाॅव-मेरी सड़क योजना’’ बहुत याद आ रही है। हम, गाॅव वालों के श्रमदान के पुट को मिलाकर और अच्छी सड़क बनाकर उनको दे सकते थे। लेकिन भाजपा सरकार ने इस योजना को भी बन्द कर दिया, ‘‘ठीक भरी दोपहरी में मेरा गाॅव-मेरी सड़क योजना का कत्ल कर दिया’’।

हरीश रावत के फेसबुक पेज से साभार

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