पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी तहसील के बाड़ा गांव के निवासी दिनेशचंद्र ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण सूचनाएं न देने और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप लगाते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी बाड़ा और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) पौड़ी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त को शिकायती पत्र भेजकर दोनों अधिकारियों की लापरवाही को सूचना अधिकार की मूल भावना के विरुद्ध बताते हुए तत्काल कार्रवाई की अपील की है।दिनेशचंद्र ने बताया कि उन्होंने 18 अगस्त 2025 को लोक सूचना अधिकारी (PIO) एवं ग्राम पंचायत अधिकारी बाड़ा को आरटीआई आवेदन प्रेषित किया था। इस आवेदन में दो प्रमुख बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी। पहला, बाड़ा ग्रामसभा में वर्ष 2015 से जुलाई 2025 तक आयोजित सभी खुली बैठकों और मासिक बैठकों के कार्यवृत्त (मिनट्स) की प्रमाणित प्रतियां। दूसरा, पिछले दस वर्षों (2015 से 2025 तक) में ग्राम पंचायत बाड़ा द्वारा अधिग्रहित की गई सभी योजनाओं, उनके स्वीकृति पत्रों, कार्यान्वयन विवरण, व्यय प्रमाण-पत्रों और लाभार्थियों की सूची सहित पूरी जानकारी। आरटीआई अधिनियम के अनुसार 30 दिनों के निर्धारित समयसीमा में सूचना प्रदान करने के बजाय अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे आवेदक को मजबूरन अपील का सहारा लेना पड़ा।इसके बाद दिनेशचंद्र ने अपीलीय अधिकारी एवं बीडीओ पौड़ी के समक्ष अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के लिए उन्हें बुलाया गया, लेकिन बीडीओ ने बिना किसी आधिकारिक मोहर, पदनाम या हस्ताक्षर के गलत और भ्रामक सूचना उपलब्ध कराई। दिनेशचंद्र का आरोप है कि प्रदान की गई जानकारी में खुली बैठकों और मासिक ग्रामसभा के कार्यवृत्त अधूरे थे, जबकि अधिग्रहित योजनाओं का विवरण छिपाया गया। यह न केवल आरटीआई अधिनियम की धारा 7 और 19 का उल्लंघन है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर भी प्रहार है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर ऐसी योजनाओं की जानकारी न देने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और आम नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है।दिनेशचंद्र ने मुख्य सूचना आयुक्त से अपील की है कि दोनों अधिकारियों पर धारा 20 के तहत जुर्माना लगाया जाए, उन्हें सही और पूर्ण सूचना प्रदान करने का आदेश दिया जाए तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर करेंगे। यह मामला ग्रामीण पंचायतों में सूचना अधिकार के कार्यान्वयन की कमजोरी को उजागर करता है, जहां अधिकारी अक्सर आवेदनों को टालते या गुमराह करते नजर आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी शिकायतें बढ़ने से प्रशासनिक सुधार को गति मिलेगी। (शब्द संख्या: ४१२)
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- Negligence Under the Right to Information: Gram Panchayat Officer and BDO Accused of Providing Misleading Information; Strict Action Demanded from Chief Information Commissioner
- मुख्य सूचना आयुक्त से कड़ी कार्रवाई की मांग
- सूचना के अधिकार में लापरवाही: ग्राम पंचायत अधिकारी और बीडीओ पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप
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