देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मां की सौगंध खाते हुए कहा कि उन्होंने किसी को भी नौकरी देने के बदले पैसा लेना तो दूर उसकी चाय तक नहीं पी. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी माता की कसम खाते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी को भी नौकरी देने के बदले में एक पैसा लेना तो दूर, उसका कभी चाय या पानी तक नहीं पिया. उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि उनकी तीन माताएं हैं, जगत जननी, देवी भवानी (मां दुर्गा), जिसकी मैं नित्य प्रतिदिन पूजा करता हूं और वह धरती मां है, जिसने मुझे पैदा किया है उत्तराखंड और मां आज मुझे बदनाम करने का षड्यंत्र हो रहा है. उन्होंने आगे लिखा कि उम्र के इस पड़ाव में मुझ पर कलंक लगाने का प्रयास हो रहा है.
उन्होंने अपनी माता को याद करते हुए लिखा कि आज मुझे बदनाम करने का कुचक्र रचा जा रहा है. उम्र के इस पड़ाव में मुझ पर कलंक लगाने का प्रयास किया जा रहा है. जिस तरह कुछ सोशल मीडिया पोस्टों और कुछ अखबारों के माध्यम से एक मुहिम चलाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई, लेकिन आज वह यह कहना चाहते हैं कि उन्होंने कभी किसी को नौकरी देने के बदले उसका कभी चाय और पानी तक नहीं पिया, बल्कि किसी को भी कुछ दिया होगा तो मैंने दिया.
अब उन पर नियोजित तरीके से कलंक का टीका लगाये जाने का दुस्साहस किया जा रहा है. हरीश रावत ने आगे लिखा कि इससे पहले भी साल 2017 के चुनाव में उन पर जुमे की नमाज की छुट्टी किए जाने का दुष्प्रचार किया गया, फिर उसके बाद साल 2022 के चुनाव में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाये जाने के वादे का झूठ फैलाया गया. लेकिन इसका अब तक कोई साक्ष्य नहीं मिला. किंतु आज यह जो कलंक मुझ पर लगाये जा रहे हैं. मैं इस कलंक के साथ मरना नहीं चाहता हूं.
उन्होंने अपनी मां की सौगंध खाकर कहा किसी चीज के बदले में पैसा लिया हो तो श्राप देना कि हरीश तूने मेरे दूध को लज्जित करने का काम किया है. उन्होंने जगदंबा से भी प्रार्थना की है कि जब तक इस कलंक को वो धो नहीं देते हैं, तब तक उनकी जिंदगी की सांसों को आगे बढ़ाते रहना. लिखा कि कभी किसी से राजनीतिक पद दिये जाने के बदले मैंने एक भी पैसा नहीं लिया. उन्होंने अपने जीवन काल में काम धंधों के लिए हजारों लोगों की सिफारिशें की, लोग जरूर मेरी मदद करते हैं और आज भी मदद कर रहे हैं.
उन्होंने अपने पूर्व ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना का जिक्र करते हुए कहा कि जिसने छाया की तरह मेरे साथ सेवा करने का काम किया, उनके जीवन भर की पूंजी को सीज कर दिया गया. उन्हें अपने बच्चे पढ़ाने हैं, जबकि मेरे पास इतने साधन नहीं है कि मैं अपने घर का खर्चा उठा सकूं. अब यह एक और चिंता बढ़ गई कि चंदन कैसे अपने बच्चों की आजीविका चलाएगा, जिसकी चिंता हो रही है. मेरे पास भी इतने साधन नहीं हैं कि मैं अपने घर का खर्चा उठा सकूं.
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