देहरादून। हल्द्वानी में फैली हिंसा की वजह से शहर का माहौल तनावपूर्ण है। हल्द्वानी में स्कूल कॉलेज बंद हैं। गुरूवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा में 4 की मौत की मौत हो गई,। आगजनी और हिंसा को देखते हुए वहां कर्फ्यू लगाया गया है। इलाके में 4 कंपनी पैरामिलिट्री और 2 कंपनी पीएसी तैनात की गई है।
बताया जा रहा है कि गुरूवार को वनभूलपुरा के मलिक के बगीचे में बनी अवैध मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने गए प्रशासन और पुलिस पर एक पक्ष के लोगों ने हमला किया।. इस हमले में तीन उपद्रवियों की मौत हो गई है. जबकि 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हैं।
नैनीताल की डीएम का कहना है कि पूरी प्लानिंग के साथ दंगा किया गया। भीड़ ने थाने को घेर लिया और थाने के अंदर मौजूद लोगों को बाहर नहीं आने दिया गया। उन पर पहले पथराव किया गया और फिर पेट्रोल बम से हमला किया गया।
राज्य गठन के बाद पहली बार हुआ जब हल्द्वानी में अशांति फैली और नौबत ये आ गई कि शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस मामले में हल्द्वानी विधायक हृदयेश ने कहा कि ये बड़ी प्रशासनिक चूक है। बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई को अंजाम दिया गया। जल्दबाजी और बिना विश्वास में लिये बिना सूचना की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस बात की जांच होनी चाहिए कि अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने इतना उतावलापन क्यों दिखाया?
भाकपा माले के जिला सचिव कैलाश पाण्डे कहते हैं कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुए तनाव के लिए भाजपा सरकार और जिला प्रशासन की अदूरदर्शिता, बेवजह की जल्दबाजी और सांप्रदायिक व्यवहार जिम्मेदार है। इसी वजह से यह स्थिति आ पहुंची है। जब नजूल भूमि पर बने नमाज स्थल और मदरसे को नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा कब्जे में लेकर कुछ दिनों पहले सील कर दिया गया था और उसके बाद से शांति थी तब प्रशासन ने जिस तरह गैरजरूरी जिद करते हुए जबरन ध्वस्तीकरण किया उसी से हल्द्वानी की स्थिति बिगड़ी है।

