भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भविष्य की संभावनाओं पर नेशनल सेमिनार आयोजित

भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भविष्य की संभावनाओं पर नेशनल सेमिनार आयोजित

देहरादून। शुक्रवार को डीएवी पीजी कॉलेज में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भविष्य की संभावनाएं विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत हुई। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों का गहन विमर्श करना तथा शोध संगोष्ठी के माध्यम से परंपरागत ज्ञान एवं आदर्शों को समाज में पुर्नस्थापित करने का सफल प्रयास करना है।

संगोष्ठी में देश के विभिन्न विवि से आये शिक्षकों एवं शोद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ दून विवि की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कालेज के प्राध्यापक और संगोष्ठी के कनवेंर डॉ० गुंजन पुरोहित ने संगोष्ठी में पहुंचे विद्वानों एवं शोधार्थियों को स्वागत किया।

संगोष्ठी में आये वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान और विज्ञान, लौकिक और पारलौकिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय है। ऋग्वेद के समय से ही शिक्षा प्रणाली जीवन के नैतिक, भौतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक मूल्यों पर केंद्रित होकर विनम्रता, सत्यता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सभी के लिए सम्मान जैसे मूल्यों पर जोर देती थी। वेदों में विद्या को मनुष्यता की श्रेष्ठता का आधार स्वीकार किया गया था।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो० दुर्गेश पंत बतौर मुख्य अतिथि मौजूद। जबकि मुख्य वक्ता के तौर पर दून विवि के प्रोफेसर एसी पुरोहित मौजूद रहे जिन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा पर सारगर्भित जानकारी दी।

इस दौरान कॉलेज के प्राचार्य प्रो० सुनील कुमार, उप-प्राचार्य एसपी जोशी, कंवेनर डॉ० गुंजन पुरोहित, आयोजन सचिव डॉ० रविशरण दीक्षित, ओएनजीसी के निदेशक डॉ० एसके शर्मा, श्री अरविंद नौड़ियाल, डॉ० विमलेश डिमरी, डॉ० जितेन्द्र सिन्हा, विभिन्न विवि और शिक्षण संस्थानों के शोध छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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