देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का 71वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन देहरादून के परेड ग्राउंड में स्थापित ‘भगवान बिरसा मुंडा नगर’ के जनरल बिपिन रावत सभागार में 28-30 नवम्बर 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय अधिवेशन में तमिलनाडू, जम्मू कश्मीर, गुजरात, और पूर्वाेत्तर राज्यों सहित सभी राज्यों से कुल 1211 प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अधिवेशन में संगठनात्मक विकास, शैक्षिक नीतियों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। साथ ही अभाविप का 71वां राष्ट्रीय अधिवेशन कई ऐतिहासिक अनुभवों का साक्षी बना जिसमें लघु भारत, तथा विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत के दर्शन करने के अवसर मिले।
अधिवेशन में भारत के स्वतंत्रता सैनानी तथा भारत के ‘स्व’ की रक्षा करने वाले तीन महान योद्धाओं कि यात्राओं को विशेष स्थान दिया गया। जिनमें रानी अब्बक्का कलश यात्रा, जो कर्नाटक में उनकी जन्मस्थली से प्रारम्भ होकर 3000 किमी से अधिक दूरी तय कर देहरादून पहुंची। इस यात्रा की उपस्थिति ने रानी अब्बक्का के शौर्य व भारत के सांस्कृतिक गौरव से युवाओं को परिचित कराया।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भगवान बिरसा संदेश यात्रा का आयोजन हुआ, जो झारखण्ड के उलिहातु से प्रारम्भ होकर अनेक स्थानों से होते हुए युवाओं में भूमि, जल व जंगल के संरक्षण तथा जनजातीय अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश लेकर युवाओं के बीच पहुंची।
श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब से लाए गए पवित्र जल-कलश का श्रद्धापूर्वक स्वागत कर मुख्य सभागार में प्रतिष्ठित किया गया जिसने अधिवेशन को ऐतिहासिक व आध्यात्मिक चेतना प्रदान की। इन यात्राओं का स्वागत तथा उनकी परिसर में उपस्थिति अधिवेशन के सांस्कृतिक मंच का केन्द्र रहीं, जिन्होंने प्रतिनिधियों में राष्ट्र-समर्पण का भाव जागृत किया।
भगवान बिरसा मुंडा नगर में आयोजित अभाविप के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कुल 5 प्रस्ताव पारित किये गये।‘ पर्याप्त वित्तीय आवंटन सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को एक संरचना के अंतर्गत लाने की आवश्यकता’, ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती’, ‘मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं के निवारण हेतु समाज की भूमिका’, तथा ‘विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध संगठित समाज ही समाधान’ विषयक इन चार प्रस्तावों को प्रतिनिधियों द्वारा प्राप्त सुझावों के अनुसार संशोधन कर पारित किया गया। साथ ही ‘समाज परिवर्तन का वाहक बने युवा’ विषयक प्रस्ताव को 27 दिसम्बर को हुई राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में पारित किया गया।
