देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अब सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन के जरिए मरीजों और लाभार्थियों से फोन पर सीधे संपर्क किया जा रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति, इलाज और जरूरी सेवाओं की जानकारी ली जा रही है। जरूरत के अनुसार उन्हें परामर्श भी दिया जाता है।
104 हेल्पलाइन की खासियत इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है। किसी मरीज के स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारी 104 कॉल सेंटर तक पहुंचती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार लाभार्थी से संपर्क कर उसकी स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की जानकारी ली जाती है। गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है।
104 कॉल सेंटर आयुष्मान भारत, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं के तहत भी लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और परामर्श दिया जाता है।
104 हेल्पलाइन के जरिए मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि योजना का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।
एक दशक में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने कॉल सेंटर से आगे बढ़कर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और फॉलोअप का सिस्टम तैयार किया है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह व्यवस्था दूरदराज के लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है। –पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
