उत्तराखंड में एक तरफ जियोथर्मल स्प्रिंग से बनाई जाएगी बिजली, दूसरी तरफ जियोथर्मल पूल में पर्यटक लेंगे गर्म पानी में नहाने का मजा, जानिए योजना
हरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग (गर्म कुंड) के जरिए एक ओर सरकार बिजली उत्पादन करने की दिशा में काम कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन विभाग इन गर्म पानी के स्रोतों के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रहा है. योजना के तहत जियोथर्मल पूल बनाने की कवायद की जा रही है.
पिथौरागढ़ के मदकोट में जियोथर्मल पूल बनाने की योजना: प्रदेश में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स को पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की जा रही है. जिसके तहत पिथौरागढ़ जिले के मदकोट से इसकी शुरुआत किए जाने की तैयारी है. जहां गर्म पानी के स्रोत के आस पास स्नान की सुविधा विकसित किए जाने का प्रस्ताव है. मदकोट में प्रस्तावित योजना के तहत पर्यटकों के लिए जियोथर्मल पूल और ठहरने की सुविधाएं विकसित करने की योजना है. गर्म पानी के स्रोत से मिलने वाले पानी का उपयोग स्नान के लिए किया जाएगा.
जियोथर्मल स्प्रिंग्स के क्या हो सकते हैं फायदे?
- जियोथर्मल स्प्रिंग्स बिजली के साथ घरेलू हीटिंग में कारगर हो सकता है.
- गर्म पानी का उपयोग कृषि, मछली पालन और ग्रीनहाउस हीटिंग में किया जा सकता है.
- सल्फर, मैग्नीशियम और अन्य खनिजों से भरपूर गर्म पानी त्वचा रोग, गठिया और मांसपेशियों के दर्द में फायदेमंद माना जाता है.
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों में घरों, होटलों और धर्मशालाओं को गर्म रखने के लिए जियोथर्मल हीटिंग सिस्टम फायदेमंद हो सकता है.
- ग्रीन हाउस हीटिंग के जरिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सब्जी और फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है.
- पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पा, गाइड सेवाएं और स्थानीय व्यवसायों को नई आय के स्रोत मिलेंगे.
पिथौरागढ़ में गोरी नदी के आस पास जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद: वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों की ओर से किए गए अध्ययन के मुताबिक, उत्तराखंड में 40 जियोथर्मल स्प्रिंग्स चिह्नित किए गए हैं. खास बात ये है कि कुमाऊं क्षेत्र में पिथौरागढ़ जिले के गोरी नदी के आस पास करीब 13 किलोमीटर के क्षेत्र में जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद है. जहां कई जियोथर्मल स्प्रिंग्स हैं.
इन प्राकृतिक स्रोतों का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर अलग-अलग जरूरतों के लिए भी किया जाता रहा है. ऐसे में अब सरकार की कोशिश है कि पर्यटन के लिहाज से उपयुक्त स्थानों को विकसित कर इन्हें राज्य के पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए. ऐसे में मदकोट की योजना सफल रहा, तो अन्य जियोथर्मल स्प्रिंग्स पर भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जा सकती है.
क्या बोले पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल? वहीं, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि, राज्य में नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में पिथौरागढ़ के मदकोट को आधुनिक पर्यटक सुविधा से जोड़ने की योजना तैयार की गई है. जहां पर कॉटेज, ठहरने की सुविधा के साथ ही हाट स्प्रिंग के पानी के जरिए स्नान की सुविधा दी जाएगी. इसमें महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थान भी बनाए जाएंगे.
इसको शुरू करने से पहले पानी की जांच, सभी सुरक्षा के पहलू आदि का अध्ययन कराया जाएगा. जिसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की मदद भी ली जाएगी. साथ ही कहा कि ऐसी परियोजनाओं का फायदा सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि, होटल, होमस्टे, खान-पान, स्थानीय परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है. वहीं, इस पूरे मामले पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि,
“बदरी विशाल का दर्शन करने के लिए पैदल बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्री थक जाते हैं. ऐसे में बदरीनाथ धाम के पास मौजूद तप्त कुंड के अंदर जब श्रद्धालु स्नान करने जाते हैं, तो उनकी थकान दूर हो जाती है. ऐसे में पहाड़ के अंदर मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स काफी ज्यादा उपयोगी है.“- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड
“लिहाजा, पर्यटन के लिहाज से उसको बढ़ाए जाने पर प्रयास किया जा रहा है. विदेशों में भी जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी से लोगों के नहाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में इस तरह के पहल को अपनाया जाएगा और पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा.“- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड
