गैरसैंण कमिश्नरीः विरोध की राजनीति का जवाब विकास की राजनीति

गैरसैंण कमिश्नरीः विरोध की राजनीति का जवाब विकास की राजनीति

गैरसैंण (चमोली)। एक बार फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने निर्णय से सबको चैकाया है। गैरसैंण में चल से विधान सभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अहम निर्णय लिया, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की हो। गैरसैंण को जिला बनाये जाने की चर्चा पहले से होती रही है, लेकिन कोई भी मुख्यमंत्री इस दिशा में कदम आगे नही पाया।

गैरसैंण में इससे पहले भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले विधान सभा सत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा कर सबको चैका दिया था। विपक्षी पार्टी केवल विरोध की राजनीति करते रहे है, जबकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विकास की राजनीति करने के पक्षधर रहे है। शायद यही कारण है कि उन्होंने गैरसैंण के विकास को सबसे ऊपर रखा है। अभी हाल ही में गैरसैंण में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 25 हजार करोड़ की लागत से गैरसैण के विकास की घोषणा की। किसी अन्य राजनेता की तरह जल्दबाजी में कोई फैसला न लेते हुए दीर्घकालिक विकास की योजना पर जोर दिया है।

अब जिस तरह से त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को कमीशनरी बनाने का निर्णय लिया है, उससे समझा जा सकता है कि गैरसैंण के विकास को लेकर मुख्यमंत्री का क्या विजन है। राजधानी बनाने से पहले वहॉ पर सभी प्रकार की आधारभूत सुविधाएं तैयार की जानी जरूरी है, जिसके लिए आज लिया गया निर्णय काफी अहम समझा जा सकता है।

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