देहरादून। देशभर में की दूसरी लहर की खबरे आ रही है। कोरोना के कहर को देखते हुए संत समाज ने भी हरिद्वार महाकुम्भ की की समाप्ति की घोषणा कर दी है। प्रदेश सरकार ने बोर्ड की परीक्षाएं भी रद्द कर दी है। इसके साथ ही साप्ताहिक कर्फ्यू भी लागू कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने देहरादून में शनिवार और रविवार को कर्फ्यू की घोषणा कर दी है।
देश में कहीं एक तरफ चुनाव चल रहे हैं तो दूसरी तरफ लाॅकडाउन चल रहा है। वहीं रविवार को उत्तराखण्ड में कोरोना की चैन को तोड़ने के लिए कई अहम फैसले लिये। कोविड-19 गाइडलाइन को सख्ती से लागू करने के लिए उन्होंने सरकार के बड़े अफसरों को आदेशित किया है। शादियों के लिए पहले 200 लोगों की अनुमति प्रदेश सरकार ने दी थी। लेेकिन अब सरकार ने इसको कम कर शादियों में केवल 100 लोगों के लिए अनुमति दी है।
वहीं मौजूदा सूरतेहाल पर चिंता जाहिर करते हुए कांग्रेस के बड़े नेता हरीश रावत सोशल मीडिया के जरिये बयान दिया है कि कोराना वाइरस इस बार बहुत घातत है। उन्होंने कहा कि कोरोना से निपटने के लिए चिंताजनक हालातों के मुकाबले तैयारियां दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि टीके का प्रचार तो किया जा रहा है लेकिन टीका नहीं है। आक्सीजन की कमी की शिकायतें जगह-जगह से मिल रही हैं। बेड नहीं हैं और जहां हॉस्पिटल आदि डेडीकेटेड किए भी गये थे, वो बंद हो चुके हैं। इस समय करोना से मरने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सरकारों को अपनी स्थानीय रणनीति को बहुत व्यापक और पुख्ता बनाने की आवश्यकता है। उत्तराखंड के अंदर हरिद्वार और देहरादून में कोरोना संक्रमण की स्थिति चिंताजनक बन गई है, यहां पर बेड फैसिलिटी आदि पर हम बात कुछ भी करें, लेकिन बेड इत्यादि बहुत कम हैं, जिससे लोग बहुत चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक ठीक कदम उठाया है, एक लिमिटेड पीरियड के लिए 2 दिन का जो स्थानीय कफ्र्यू जैसा रखा है, वो ठीक कदम है। हरिद्वार और देहरादून में सब तरीके के उपाय काम में लाये जाने चाहिये और मैं लोगों से यह अपील करना चाहूंगा कि सोशल डिस्टेंसिंग विशेष तौर पर मास्क पहनना व सेनीटाइजर का अधिकतम उपयोग करना, इसको अपना स्वभाव बना लें। क्योंकि मुझे लगता है कि यह लंबे समय तक हमारी सारी स्थिति बनी रहनी है और सरकार को टीकाकरण के लिए भी व्यवस्था करनी चाहिये।
