देहरादूनः पहाड़ की लाइफलाइन निजी बस सेवा को प्रदेश सरकार शुरू करने की तैयारी में है। कोरोना कफ्र्यू के दौरान प्रदेश में निजी बसों का संचालन भी पूरी तरह बंद था। सरकार प्रदेश निजी बस आॅपरिेटर्स को राहत देने की तैयारी में है।
जानकारी के मुताबिक सरकार इन वाहनों के संचालन के लिए फार्मूला भी तैयार कर लिया है। सरकार वाहनों को दो-तिहाई यात्री क्षमता के साथ संचालित करने की अनुमति देने को तैयार है। वाहन स्वामियों के हितों का ध्यान रखते हुए किराया भी डेढ़ गुना किया जा सकता है।
कोरोना की लहर के चलते प्रदेश में उद्योग व्यापार के साथ-साथ निजी बसों का संचालन भी ठप्प है। कोरोना की लहर निजी बस आॅपरेटर्स पर भी काफी भारी पड़ी है। गत वर्ष तकरीबन पांच माह इन निजी बसों का संचालन बंद रहा। दूसरी लहर के बाद विगत डेढ़ माह से वाहनों का संचालन ठप है।
सरकार ने जिले के अंदर संचालित होने वाले यात्री वाहनों को पचास फीसद यात्री क्षमता के साथ संचालन की अनुमति तो दी है, लेकिन यात्री कम होने और किराया न बढने के कारण इन वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। बस संचालक सरकार से लगातार किराया दोगुना करने की मांग कर रहे हैं। बस संचालकों का तर्क है की आधी सवारी में मौजूदा किराये के साथ वाहनों का संचालन करना संभव नहीं है।
इसको लेकर उत्तराखड बस आपरेटर्स महासंघ ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि निजी बस आपरेटर्स की दिक्कतों को देखते हुए सरकार यात्री संख्या और किराया बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसको लेकर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से चर्चा हो गई है। अब सरकार निजी बसों के संचालन को लेकर जल्द फैसला लेगी।
