डा० इन्दिरा हृदयेश पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

डा० इन्दिरा हृदयेश पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष डा० इदिरा हृदयेश पंच तत्व में विलीन हो गई है। सोमवार को हल्द्वानी के चित्रशिला घाट में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। रविवार को दिल्ली में उनका हृदयघात से निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर देर रात को दिल्ली से पैतृक आवास हल्द्वानी लाया गया। सुबह उनके पार्थिव शरीर को जनता के दर्शन के लिए हल्द्वानी के स्वराज आश्रम में रखा गया जहां क्षेत्र के लोगों ने उनके अंतिम दर्शन कर अपनी श्रद्धांजलि दी।

उनकी अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, कांग्रेस नेता हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह प्रदेश में पक्ष-विपक्ष के बड़े नेता समेत बड़े संख्या में क्षेत्र जनता शामिल हुई।

इन्दिरा जी का सफर

डा० इंदिरा हृदयेश का जन्म संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सन् 1941 में हुआ। वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए पहली बार सन् 1974 में निर्वाचित हुई। उसके बाद सन् 1986 में दूसरी , सन् 1992 में तीसरी और सन् 1998 में चैथी बार निर्वाचित हुई।

जब सन् 2000 में पृथक उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई तो डा० इंदिरा को अंतरिम विधानसभा में विपक्ष की नेता चुना गया। सन् 2002 की कांग्रेस सरकार में वे उत्तराखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई और कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी। इस कार्यकाल में उन्होंने लोक निर्माण, संसदीय कार्य, राज्य संपत्ति ,सूचना विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

सन् 2012 में कांग्रेस सरकार में वे एक बार फिर कैबिनेट मंत्री बनी। इस बार उन्होंने वित्त, वाणिज्यिक कर, टिकट और पंजीकरण, मनोरंजन कर, संसदीय कार्य ,जनगणना ,भाषा जैसे विभागों का जिम्मा निभाया।

महिला सशक्तिकरण की मिशाल

महिला सशक्तिकरण की बात करें तो डा० इंदिरा हृदयेश से बड़ा नाम उत्तराखंड की राजनीति में कोई नहीं है। उत्तराखंड की राजनीति में वे महिलाओं के लिए एक आदर्श रोल मॉडल हैं। प्रदेश में कई महिला नेत्री उनका अनुसरण करके अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। वे आयरन लेडी कांग्रेस ही नहीं पूरे प्रदेश की राजनीति के क्षेत्र में एक अनमोल धरोहर हैं। वे राजनीति के क्षेत्र में सबकी दीदी थी। पक्ष-विपक्ष के सभी नेता उनसे महत्वपूर्ण मामलों में हमेशा सलाह-मशविरा करते थे।

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