आर्येन्द्र को मिली हाईकमान से फटकार, दिल्ली किया तलब

आर्येन्द्र को मिली हाईकमान से फटकार, दिल्ली किया तलब

देहरादून। प्रदेश के कांग्रेस नेता आर्येन्द्र शर्मा को पार्टी हाईकमान ने कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर हाईकमान के साथ प्रदेश के बड़े नेताओं का मंथन चल रहा है। दिल्ली सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मीडिया के जरिये आर्येन्द्र शर्मा की अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी को पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लिया है और इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताया है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए हाईकमान ने आर्येन्द्र शर्मा को दिल्ली तलब किया है।

सूत्रों के मुताबिक हाईकमान ने पार्टी नेताओं के साथ उत्तराखण्ड में प्रदेश अध्यक्ष के लिए फार्मूला तैयार किया है। जानकारी के मुताबिक अध्यक्ष पद पर किसी विधायक या राष्ट्रीय संगठन में पदाधिकारी रहे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जाएगा।

आर्येन्द्र शर्मा और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय खासे करीबी बताये जाते हैं। भले ही किशोर उपाध्याय की सहसपुर की हार के लिए आर्येन्द्र शर्मा कसूरवार रहे हो लेकिन सूत्र बताते हैं कि किशोर उपाध्याय से अपनी करीबी होने के चलते आर्येन्द्र शर्मा ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।

आर्येन्द्र शर्मा के सियासी सफर की बात करें तो वे प्रदेश कांग्रेस में पूर्व महासचिव रहे हैं। उन्होंने पहली दफा 2012 में सहसपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन वे ये चुनाव हार गये। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर सहसपुर से टिकट की दावेदारी की लेकिन पार्टी ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को टिकट दे दिया।

आर्येन्द्र शर्मा के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को लेकर कई बाधाएं हैं। पहले सबसे बड़ी बाधा हाईकमान का वह फार्मूला जिसमें शर्त रखी गई है कि विधायक हो या राष्ट्रीय पदाधिकारी। आर्येन्द्र शर्मा हाईकमान के इस फार्मूले में दूर-दूर तलक फिट नहीं बैठते।

दूसरी सबसे बड़ी बाधा उन पर बगावती होने का बड़ा दाग है। सहसपुर से ताल्लुक रखने वाले पार्टी के एक बड़े कार्यकर्ता बताते हैं कि 2017 में आर्येन्द्र शर्मा यदि अपने बगावती तेवर नहीं दिखाते तो किशोर उपाध्याय आज विधानसभा में होते।

तीसरी बड़ी बाधाये है कि आर्येन्द्र शर्मा सर्वमान्य नेता नहीं है। सहसपुर विधान सभा जहां से वे विधायकी के लिए दावेदारी करते हैं वहां के लोग अभी भी उन्हें बाहरी मानते हैं।

सहसपुर से ही कांग्रेस के एक दूसरे कार्यकर्ता बताते हैं कि आर्येन्द्र शर्मा की छवि कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वाले नेता की बन गई है। क्षेत्र में वे भाजपा के एजेंण्ट के तौर पर कुख्यात हैं। दूसरा प्रदेश अध्यक्ष पद पर ऐसा नेता की ताजपोशी होनी चाहिए जो पूरे उत्तराखण्ड में पहाड़ से लेकर मैदान तक सर्वमान्य हो। ऐसा नेता जो अपने क्षेत्र में ही सर्वमान्य नहीं है वे प्रदेश अध्यक्ष के लिये दावेदारी किस आधार पर कर सकते हैं।

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