रिपब्लिक डेस्क। सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री इन दिनों विपक्षी दलों के निशाने पर है। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर विपक्ष ने डा० धन सिंह रावत पर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों को कहना है कि डा० धन सिंह रावत ने नियमों कायदों को दरकिनार कर अपने चहेतों, रिश्तेदारों और आरएसएस के अपने करीबियों को विश्वविद्यालय में नियुक्ति दी है। उत्तराखण्ड में अपनी सियासी जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी ने बाकायदा प्रेस वार्ता कर डा० धन सिंह रावत के भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजने तक की मांग कर डाली।
उत्तराखण्ड में ये पहला मामला नहीं है जब सरकार में बैठे किसी जिम्मेदार पर इस तरह के संगीन आरोप लगे हों। इससे पहले भी कई मर्तबा पिछली सरकारों में बैठे जिम्मेदारों को अपने नियमों को ताक पर रख कर करीबियों और रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी पर नियुक्ति करने के आरोप लगते रहे हैं। सत्ता में बैठकर अपने को रेवड़ियां बांटने वालों की लम्बी फेहरिस्त है।
प्रदेश में इस वक्त चुनावी रणभेरी बज चुकी है। प्रदर्शन और रैलियों का दौर शुरू हो चला है। जहां सत्ता पक्ष वापिसी करने की जुगत में लगा हैं। वही विपक्षी पार्टियां सत्ताधारी दल को सत्ता से बेदखल की तैयारी में जुटा हुआ है। पक्ष-विपक्ष की अपनी-अपनी दलीलें है। नेताओं की नई-पुरानी कुण्डलियां खंगाली जा रही हैं।
एक दूसरे को पटखनी देने के लिए सोशल मीडिया, खासतौर पर फेसबुक को उत्प्रेरक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इधर नेताजी ने बयान दिया उधर सोशल मीडिया में तैनात सियासी दलों के कर्मठ सिपाही अपने दलों के सियासी नफा नुकसान के हिसाब के उसे आगे बढ़ा रहे हैं।
बात चहेतों और रिश्तेदारों को सरकारी विभागों में नियुक्तियां देने की चल रही थी। तो इस कालिख से शायद ही सत्ता पक्ष और विपक्ष बचा हो।
सत्ता पक्ष के नेता और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल पर भी इस तरह के आरोप लगे हैं। उन पर इंजीनियर बेटे को नियमों को ताक पर रख कर नौकरी दिलाने के आरोप लगे हैं।
सत्ताधारी पार्टी के नेता और देहरादून के महापौर सुनील उनियाल गामा पर भी अपनी सीए बेटी को सरकारी नौकरी में एडजस्ट करने के आरोप लगे हैं।
विपक्षी दल इसको मुद्दा बनाकर जनता के बीच पेश कर रही है। लेकिन जैसा की हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। और राजनीति में भी यह नियम पूरी तरह लागू होता है। सत्ताधारी दल भी उसी तरह विपक्ष को मुहंतोड़ जवाब दे रही है। विपक्षी नेताओं के पूराने मामलो सामने ला कर आईना दिखाया जा रहा है। जनता की यादाश्त पर पड़ी धूल को साफ करने की कोशिश कर रही है।
प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी सत्ता का सुख भोग चुकी है। चुनावी मौसम है तो कांग्रेसी नेताओं पर भी सत्ता में रहने के दौरान इसी तरह के आरोप लग रहे हैं।
कांग्रेस के नेता और पूर्व विधान सभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पर भी बेटी दामाद को विधान सभा में नौकरी पर लगाने के आरोप हैं। इसको लेकर उस दौरान के अखबारो ंकी कटिंग सोशल मीडिया में तैर रही हैं। पूर्व मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी पर भी शिक्षा मंत्री रहते इसी तरह अपने रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों पर लगाने के आरोप हैं। उन पर अपनी बेटियों को शिक्षा विभाग और विधानसभा में नियमों से परे नौकरी दिलाने के खूब आरोप लगे।

