अखण्ड राष्ट्रवादी पार्टी की उत्तराखण्ड विधान सभा चुनाव में उतरने की तैयारी, भाजपा के मौजूदा कैबिनेट मंत्री होंगे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार!

अखण्ड राष्ट्रवादी पार्टी की उत्तराखण्ड विधान सभा चुनाव में उतरने की तैयारी, भाजपा के मौजूदा कैबिनेट मंत्री होंगे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार!

रिपब्लिक डेस्क। अखण्ड राष्ट्रवादी पार्टी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के बाद उत्तराखण्ड में अपने संगठन का विस्तार कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखण्ड राष्ट्रवादी पार्टी मजबूती के साथ उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी। पार्टी का दावा के भाजपा के 6 विधायक और कांग्रेस के 2 विधायक उनके सम्पर्क में हैं। पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भाजपा के केबिनेट मंत्री उनके पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। पार्टी का कहना है कि जल्द ही वे उत्तराखण्ड में संगठन का विस्तार करने जा रहे हैं। और उचित समय आने पर पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार का ऐलान करेंगे।

पार्टी के उपाध्यक्ष ने बताया कि वे उत्तराखण्ड में मजबूत संगठन तैयार करेंगे और यहां की जनता को बेहतर राजनीतिक विकल्प देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य स्व० अमर सिंह के अखण्ड भारत के सपनों को सरकार करना है। पाटी किसी राजनैतिक दल के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि अपनी पार्टी के जनाधार और अपने मद्दों जिनमें शिक्षा, रोजगार, किसानों का हित, राष्ट्रवाद और महिलाओं का विकास जनोपयोगी योजनाओं को क्रियान्वयन होगा। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य स्वच्छ राजनीति करना है जिससे जनता और समाज के साथ देश का विकास हो सके।
फिलहाल प्रदेश में चुनावी रंग में रंग गया है। राजनीतिक यात्राओं और सभाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस परिवर्तन यात्रा के साथ जनता की बीच जा रही है। सत्ताधारी भाजपा जन आशीर्वाद यात्रा के साथ सरकार की विकास योजनाओं को लेकर जनता के बीच में हैं। आम आदमी पार्टी तिरंगा यात्रा निकाल का मतदाताओं को लुभा रही है। सभी सियासी दलों के अपने वादे और अपने दावे हैं।

लेकिन अखण्ड राष्ट्रवादी पार्टी के कैबिनेट मंत्री को प्रदेश में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किये जाने के इस दावे के बाद अचानक सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक पण्डितों का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने कर्नल अजय कोठियाल को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के बाद से ही बड़े नेताओं का आप में शामिल होने के रास्ते बंद कर दिये हैं। राजनीतिक जानकार उन मंत्रियों के नामों पर कयास लगा रहे जो भाजपा में गये तो थे मुख्यमंत्री बनने के लिए लेकिन अभी तक वहां उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाई है।

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