बदलती जलवायु में खाद्य समस्या के समाधान को SGRR विवि में जुटे देशविदेश के 970 शोद्यार्थी

बदलती जलवायु में खाद्य समस्या के समाधान को SGRR विवि में जुटे देशविदेश के 970 शोद्यार्थी

वीसी यू०एस० रावत ने उत्तराखंड में बढ़ते जलवायु परिवर्तन पर भी जताई चिंता
जल वायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक विचार विमर्श की आवश्यकता जताई

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कृषि संकाय और एग्रीकल्चर एंड एनवायरमेंटल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में तीसरी दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का गत 18 अक्टूबर को समापन हुआ।
कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय ग्लोबल इनीशिएटिव इन एग्रीकल्चर फॉरेस्ट्री और अप्लाइड साइंस पर आधारित खाद्य सुरक्षा पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास को रखा गया।

विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज में आयोजित इस कांफ्रेंस का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी व विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री चौधरी अजीत सिंह, चेयरमैन, रेशम फेडरेशन और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर यू एस रावत ने किया। इस अवसर पर कांफ्रेस को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हो रहे विकास को दुनिया आशा भरी नज़रों से देख रही है। इस विकास यात्रा का भविष्य युवा कृषि वैज्ञानिकों की दूरदर्शी सोच पर निर्भर करता है।

वहीं उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ यू०एस० रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत खुशी का पल है जब विश्व स्तर पर विश्वविद्यालय ज्वलंत समस्या सतत विकास और खाद्य सुरक्षा पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश, जहां पर पहले कभी भी खाद्यान्न की आपूर्ति की समस्या नहीं देखी गई है क्योंकि यहां पर बहुत अच्छी तादाद में उत्पादन होता रहा है जबकि आज समय बदल चुका है। जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है खाद्यान्न की आपूर्ति की समस्या भी नजर आने लगी है।

इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर मोइनुद्दीन ने संयोजक सचिव के तौर पर जानकारी देते हुए बताया कि यह कॉन्फ्रेंस ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही रूप से संचालित की जा रही है। जिसमें भारत, नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया, और चीन आदे के 970 से भी ज्यादा प्रतियोगी ने शोधपत्र ऑनलाइन ऑफलाइन मोड में प्रस्तुत किए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलती जलवायु में खाद्य समस्या का समाधान एवं किसानों की आय बढ़ाना था। हम सबको प्राकृतिक संसाधनों को अत्यधिक सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करते हुए अपने जीविका तथा आय बढ़ाने के लिए उपयोग करना होगा। इस सम्मेलन से जहां एक तरफ हमारे विश्वविद्यालय के युवाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोजर मिला वही विश्वविद्यालय का नाम भी अंतरराष्ट्रीय पटल पर और बेहतर से उभरा है

कांफ्रेंस का संचालन डॉ पारुल अग्रवाल, डॉ प्रियंका बनकोटी और डॉ हुमा ने किया। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रोफेसर अमर गर्ग, डॉ सी.पी सिंह, डॉ. वाजिद हुसैन, डॉ. दीपक साहनी, डॉ. मालविका कांडपाल और दीपक सोम के साथ ही विश्वविद्यालय के शिक्षक और प्रतिभाग करने वाले छात्र एवं छात्राएं मौजूद रहे।

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