देहरादून। मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में फार्मासिस्टों की भर्ती को लेकर प्रस्ताव ना लाए जाने से बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट खासे नाराज है। डिप्लोमा फार्मासिस्टों को इस कैबिनेट मीटिंग से बड़ी आस थी। लेकिन कैबिनेट में प्रस्ताव ना उठने से उन्हें मायूसी हाथ लगी है। अब नाराज फार्मासिस्टों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मशाल जुलूस निकालने का फैसला लिया है।
बुधवार को प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट महासंघ के पदाधिकारियों ने गूगल मीट के जरिए मीटिंग की। जिसमें फार्मासिस्टों की लगातार उपेक्षा पर महासंघ के पदाधिकारियों ने अपना आक्रोश जाहिर किया। गूगल मीट के दौरान पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ मशाल जुलूस निकालने का फैसला लिया है। बेरोजगार फार्मासिस्ट विनायक डिमरी और सोनल ने कहा ‘सरकार अगर जल्दी 536 पदो पर विज्ञप्ति जारी नही करती हैं और 1336 पदो को सृजित नही करती है तो वह आत्मदाह के लिए मजबूर हो जायेंगे।’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वस्थ मंत्री डा० धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री बंशी धर भगत पूरी तरह जिम्मेदवार होंगे।
महासंघ के मीडिया प्रभारी हरिप्रकाश सेनवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द से जल्द फार्मासिस्ट के रिक्त पदों पर विज्ञप्ति नहीं निकालती और 1336 फार्मासिस्ट के पदों का सृजन नहीं करती है तो 21000 फार्मासिस्ट विपक्षी पार्टी के बैनर तले खड़े होकर आक्रोश रैली निकालेगी।
प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महादेव गौड़ ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई त्रिस्तरीय वार्ता में आईपीएचएस के मानकों में शिक्षिलता प्रदान करने की सहमति बनी थी पर अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आठ दिन के आमरण अनशन के बाद मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में जल्द सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने धरनास्थल पर आकर अनशन खुलवाया था। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि जल्द राज्य सरकार इस सम्बन्ध में कोई फैसला लेगी पर अभी तक कुछ नहीं हुआ।
बैठक में महासंघ अध्यक्ष महादेव गौड़, जय प्रकाश गैरोला, सोनल, हरी प्रकाश सेनवाल, अनुज पुंडीर धनपाल रावत, रविन्द्र समेत कई बेरोजगार फार्मास्टि मौजूद रहे।
गौरतलब है कि प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा (एलौपैथिक) फार्मासिस्ट विगत 19 अगस्त से एकता बिहार में आंदोलनरत है। इस दौरान वे अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का लगभग हर लोकतांत्रिक जतन कर चुके हैं। लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
बता दें कि प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट महासंघ वर्ष 2005-06 में उपकेन्द्रो पर सृजित फार्मासिस्ट के 536 पर आइपीएचएस मानकों में शिथिलता प्रदान करते हुए यथावत रखने, रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने 600 उपकेन्द्रों पर संविदा के आधार पर की जा रही भर्ती के बजाय नियमित भर्ती करने, 1368 स्वास्थ्य उपकेन्द्रों पर फार्मासिस्ट के पद सृजित करने, राजकीय मेडिकल कालेजों में फार्मासिस्ट संवर्ग का ढाँचा स्थापित कर नियुक्ति करने, सभी मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता सुनिश्चित करने आदि मांगों को लेकर लगातार संघर्षरत हैं।
