सौरभ गुसांई
विधानसभा चुनाव नजदीक आते आते चुनावी समीकरण बदलने से उत्तराखंड की सियासी फिजाओं में फिर से बगावतें महकने लगीं हैं। उत्तराखंड कांग्रेस का तो इतना बुरा हाल की पार्टी मुख्यालय में ही महिला कांग्रेस की अध्यक्ष खुले आम बयान दे रही है कि अगर भाजपा टिकट देगी तो जरूर वहीं जाऊंगी, उनपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं। उधर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने तो ऐसा कुछ बयान भी नहीं दिया,भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम को बस सूरज डूबने के बाद एक बन्द कमरे में मिल गए और दिल्ली से फरमान जारी हो गया कि किशोर को सभी पदों से मुक्त किया जाय।
चलिए इन दोनों नेतागणों को कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ज्यादा तबज्जो नहीं देता होगा पर अब बात कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की। साल 2016 तत्कालीन हरीश रावत की सरकार और 18 मार्च को सूरज डूबते ही बगावत कर कांग्रेस से भाजपा में आये नों विधायकों की मुखिया के रूप में मंत्री हरक सिंह रावत को माना जा रहा था। मंत्री हरक सिंह के साथ गए अन्य 7 विधायक भाजपा में लगभग रम गए हैं। साथ आये मंत्री सुबोध उनियाल तो भजपा की सरकार में मंत्री के साथ साथ सरकार के शासकीय प्रवक्ता भी बना दिये गए। अब आठवें विधायक हैं उमेश कुमार शर्मा जो मंत्री हरक सिंह को कहेंगे वो करने में विवस हैं पर मन उनका भाजपा में ही है। यही एक कारण है कि मंत्री के साथ भाजपा में आये अन्य 8 में से केवल उमेश कुमार शर्मा ही दिल्ली पहुंचे हैं।
अब चक्रव्यूह की ओर चलते हैं। मंत्री हरक सिंह रावत दिल्ली में कांग्रेस पर अपनों के लिये टिकटों की संख्या और मनचाही सीटों का दबाव बनाते तब तक भजपा ने उन्हें पार्टी और सरकार ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। अब हरक के पास कांग्रेस पर दबाव कोई भी विकल्प नहीं बचा। अब उनके पास बस याचना का ही एक विकल्प बचा है। हरक अपने साथ साथ बहू अनुकृति गुसाईं के लिए भी लैंसीडॉन से टिकट की माग कर रहे हैं और एक टिकट मसूरी से भी चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस सहज हो सकती है तो केवल दो सीटों पर मंत्री के साथ बहू के लिए। भाजपा और कांग्रेस दोनों उन्हें डोईवाला के चक्रव्यूह में डाल कर उनका कोई भी सीट से चुनाव जीतने का भ्रम तोड़ना चाहती है एक बात सच है की यह चुनाव मंत्री हरक सिंह रावत के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ सामने खड़ा दिखाई देगा डोईवाला से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत वर्तमान में विधायक हैं और बहुत संभावनाएं हैं कि वे इस विधानसभा में भी डोईवाला से ही चुनाव लड़ने ऐसी स्थिति में हरक सिंह रावत त्रिवेंद्र सिंह रावत चुनावी रण में आमने सामने होंगे कांग्रेस से हीरा सिंह बिष्ट पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहते हैं और हीरा सिंह बिष्ट चाहेंगे कि उन्हें कांग्रेस के टिकट पर डोईवाला से ही उन्हीं का हक है। ऐसे में त्रिवेन्द्र और हरीश दोनों कैसे हरक को अभेध्य चक्रव्यूह में फंसाते हैं ये इस चुनाव में देखने को मिलेगा।

