देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति के कैलेण्डर पर बगावत का मौसम चल रहा है। ये कैलेण्डर पहाड़ से लेकर मैदान तक बगावत दर्शा रहा है। बगावत के सुर दूर पहाड़ से देहरादून और दिल्ली तक सुनाई दे रहे हैं। टिकटों के ऐलान के बाद भाजपा-कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। लेकिन इसके बाद भी टिकट के कुछ ऐसे प्रबल दावेदार भी हैं जिनके लिए संगठन सबसे ऊपर है। टिकट कटने के बावजूद भी संगठन से उन्हें कोई रंज नहीं है।
ऐसा ही एक नाम सामने आया है लैंसडौन विधानसभा से कांग्रेस की प्रबल दावेदार रही ज्योति रौतेला का। कांग्रेस की दूसरी सूची में लैंसडौन से उनकी बजाय हरक सिंह रावत की पुत्रबधू अनुकृति गुंसाई को टिकट दिया गया है। जिससे ज्योति रौतेला के समर्थकों में खासा आक्रोश है। लैंसडौन विधानसभा से ताल्लुक रखने वाली ज्योति रौतेला अखिल भारतीय महिला कांग्रेस में सचिव हैं।
ज्योति रौतले पिछले 11 साल से राजनीति कर रही है। उन्होंने साल 2011 में युवा कांग्रेस का चुनाव लड़ा, साल 2012 में विधानसभा का चुनाव लड़ा। साल 2017 विधानसभा चुनाव की तैयारी की लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे इस बार भी चुनाव की तैयारी में जुटी हुई थी लेकिन इस बार भी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। लेकिन फिर ज्योति रौतेला पार्टी के इस फैसले बिल्कुल भी नाराज नहीं है।
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये कहा है कि ‘मुझे अनेक माध्यम से कह रहे हैं कि मैं इसका विरोध नहीं कर रही हूं, मुझे इसका बात का दुख नहीं है या मैं किसी और को सपोर्ट कर रही हूं, नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। लेकिन मैंने जब कांग्रेस का झंडा उठाया गांव-गांव घूमी और मैंने उस वक्त लोगों के सामने एक बात बोली कि मैं कांग्रेस संगठन से हूं और पिछले 11 वर्षों से क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी पार्टी मुझे मौका देगी, लेकिन अगर मुझे यह मौका नहीं मिलेगा तो भी मैं कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य करूंगी।’
उन्होंने आगे सवाल करते हुए लिखा है कि ‘क्या मैं अपनी इन बातों को गलत ठहरा दूं? जो कांग्रेस संगठन के लोगों ने मेरी लड़ाई लड़ी है व संगठन के लोगों ने मुझे मौका दिया जिसके कारण मैं आप लोगों के बीच में हूं। उसके खिलाफ कैसे जाऊं हो सकता है?
उन्होंने कहा कि ‘मुझे खुद पर और अपने संगठन पर पूरा विश्वास है और खुद के ऊपर भी इतना विश्वास है कि मैं हमेशा लोगों के लिए कार्य करती रहूंगी। शायद आज तक कुछ कार्य ऐसे थे जो हम खुलकर नहीं कर पा रहे थे आने वाले समय में आपको ज्योति रौतेला अपनी लैंसडौन विधानसभा में कुछ बड़े मुद्दों के साथ कुछ बड़े कार्यों के साथ दिखेगी।
उन्होंने अपने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि ‘जिन्हें मुझसे बहुत उम्मीद थी और कुछ मेरे साथी जिन्होंने दिन-रात ना देखते हुए निस्वार्थ भाव से मिलकर कार्य किया मेरे साथ लगे रहे मेरे छोटे भाई बहने बुजुर्ग जिन्हें मुझसे बहुत उम्मीद थी मैं उन सभी को बोलना चाहते हूँ कि आप सब उम्मीद मत खोइये। ज्योति जैसे कल आपकी बेटी थी, आज भी आपकी बेटी है। जैसे कल आपकी बहन थी, आज भी आपकी बहन है और आने वाले समय में जो कार्य मैं करना चाहती हूं उसके लिए मुझे विधायक के पद की आवश्यकता नहीं है आप लोगों का प्यार आप लोगों का साथ आप लोगों का आशीर्वाद रहेगा तो मैं आप लोगों से वादा करती हूं कि मैं बदलाव लेकर आऊंगी और अपने भाइयों के लिए अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करूंगी।’
मेरे मन में भी सवाल है, मैं भी दुखी हूं, कि आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया गया है? मैं यह नहीं कहती कि मुझे इस बात का दुख नहीं है या मेरे मन में सवाल नहीं है। क्योंकि जब कोई भी आदमी मेहनत करता है तो उसे उम्मीद भी होती है कि उसे उसकी इस मेहनत का फल जरूर मिलेगा लेकिन आप सभी लोगों को भी मुझ पर विश्वास रखना पड़ेगा और मुझे भी अपने संगठन पर विश्वास रखना पड़ेगा की आने वाला भविष्य अच्छा होगा।

