देहरादून। विधानभा में अपने सगे-सम्बन्धियों को एडजस्ट कराने में में पक्ष-विपक्ष का शायद ही कोई नेता अछूता रहा है। सत्ता पक्ष के नेता हो या विपक्ष कांग्रेस जब भी इन्हें मौका मिला उन्होंने अपनों को विधानसभा में रोजगार लगाने में कोई देरी नहीं की। कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल तो इसको लेकर पिछले दिनों मीडिया के खासे निशाने पर रहे। लेकिन इनके अलावा भी पक्ष-विपक्ष के नेताओं की लम्बी फेहरिस्त है जिन्होंने अपने सगे-सम्बन्धियों को सत्ता में रहकर विधानसभा में एडजस्ट कराया। जिनकी सूची सोशल मीडिया में अभी तक तैर रही है। यही वजह है विधानसभा भर्ती को लेकर कांग्रेस भी खुलकर मुखर नहीं हो पा रही है।
हालांकि अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी ने इस पर जांच गठित कर दी है। जो अपनी रिपोर्ट 30 दिन में विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेंगे। लेकिन सोशल मीडिया में नेताओं के उन सगे-सम्बन्धियों को सूचियां तैर रही है जिन्हें विशेषाधिकार की आड़ में विधानसभा में नौकरी पर लगाया गया हैं। इन सूचियों में विधानसभा में सम्पादक पद पर नियुक्त इंशात कुमार का नाम भी है। जिसे राज्यसभा सांसद डा० कल्पना सैनी का भतीजा बताया जा रहा है। जानकारी के मताबिक इशांत कुमार कल्पना सैनी के भाई आदेश सैनी का बेटा है। हालांकि ये पोर्टल सोशल मीडिया तैर रही सूची की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
बता दें डॉ० कल्पना सैनी राज्यसभा सांसद है। इनके पिता पृथ्वी सिंह विकसित उत्तर प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री रहे हैं। डॉ कल्पना सैनी पूर्व में भाजपा रुड़की की जिलाध्यक्ष भी रही हैं। राज्य पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष भी रही हैं।


