देहरादून। उत्तराखण्ड के जंगलों में आग ने प्रचण्ड रुप अख्तियार कर लिया है। अकेले पिछले 48 घटे में उत्तराखंड के जंगलों में 65 जगह आग लगने से बेशकीमती सम्पदा खाक हो गई है। सरकारी आंकड़ो के मुताबिक इस साल वनाग्नि की 983 घटनाएं हो चुकी है। जिससे 1293 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वर्तमान में 40 एक्टिव फायर चल रही है। वनाग्नि से से सबसे ज्यादा नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल जिले प्रभावित हुए हैं।
हालात ये है कि जंगलों में आग के चलते पूरे वातावरण में धंुध छाने लगी है। प्रदेश का शायद ही कोई स्थान हो जो वनाग्नि से अछूता हो। राज्य के स्थानों में जंगलों की आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुकी है। इस साल वनाग्नि के साल 2016 में लगी वनाग्नि का भी रिकार्ड तोड़ दिया है।
पौड़ी जिले के नैनीडांडा क्षेत्र में कई इलाकों में आग आवासीय भवनों तक पहुंच चुकी है। वहीं प्राथमिक विद्यालय डुगरी का भवन भी वनाग्नि के चलते खाक हो गया है। राज्य का कुमाऊं मण्डल भी वनाग्नि से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ जिले की बात करें तो यहां सुवालेख, भीड़ी, सुवालेख के जंगल पिछले दो दिनों से धधक रहे हैं।
गढ़वाल मण्डल के टिहरी में सकलाना घाटी का मिश्रित वन को भी जंगल की आग ने अपने आगोश में ले दिया है। पिछले तीन दिनों से लगी आग के चलते सकलाना घाटी का मिश्रित वन 90 प्रतिशत खाक हो गया है।
प्रदेश सरकार की ओर से जंगल की आग को काबू पाने के लिए 12 हजार वनकर्मी लगे हैं। 1300 फायर स्टेशन बनाए गए हैं। जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए स्थानीय लोग भी आगे आ रहे हैं।
वहीं उत्तराखण्ड के जंगलों में धधकती आग पर काबू पाने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रदेश को दो हैलीकाप्टर मुहैया कराए हैं। इनमें एक हेलीकाप्टर गौचर और दूसरा हल्द्वानी में तैनात रहेगा। इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने एनडीआरएफ की टीम को उत्तराखण्ड भेजने का आश्वासन दिया है।
प्रदेश के वन मंत्री हरक सिंह रावत ने बताया कि वनाग्नि के चलते अभी तक चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सात मवेशी भी जंगल की आग की चपेट में आ चुके हैं।
वन विभाग के अब तक आंकड़ों के अनुसार 1 अक्टूबर, 2020 से 4 अप्रैल, 2021 की सुबह तक जंगलों की आग से करीब 38 लाख 47 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। आग की घटनाओं के कारण अब तक 4 लोगों की मौत हुई है और 2 लोग घायल हुए हैं। 7 पशुओं की भी आग के कारण मौत हुई है और 22 पशु घायल हुए हैं। हर साल की तरह इस बार में आग लगने से सबसे नुकसान पौड़ी जिले में हुआ है। यहां अब तक आग की 92 घटनाओं में 217.4 हेक्टेअर जंगल जल गये हैं और दो लोगों की मौत हुई है। दो अन्य लोगों की मौत अल्मोड़ा जिले में हुई है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में आग लगने की 94-94 घटनाएं दर्ज की गई हैं। पिथौरागढ़ में 153.5 हेक्टेअर और चम्पावत में 128.9 हेक्टेअर जंगल जले हैं।
जंगलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों 10 हजार वन प्रहरी नियुक्ति करने की घोषणा की थी, लेकिन आग की घटनाओं के चरम पर पहुंचने के बावजूद ये नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 2522 स्थानीय नागरिक आग बुझाने में वन विभाग के कर्मचारियों की मदद कर चुके हैं। वन विभाग के 4313 कर्मचारी आग बुझाने के काम में शामिल हुए हैं, जबकि 74 पुलिसकर्मी, 31 एसडीआरएफ के जवान और राजस्व विभाग के 9 कर्मचारी भी अब तक आग बुझाने के सहयोग कर चुके हैं।
इस वर्ष सर्दियों में उत्तराखंड में बहुत कम बारिश और बर्फबारी होने और फरवरी से ही लगातार बढ़ रहे तापमान को आग लगने की घटनाओं का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
