देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया है कि वह ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले एक पुलिस अधिकारी की विधवा के पक्ष में विशेष पेंशन को मंजूरी देते हुए उसे यह पेंशन प्रदान करे। रमेश चंद राजवार, पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर थे।
साल 2013 में, वह पुलिस स्टेशन धारचूला में तैनात थे। उस दौरान वे वन तस्करी व अवैध शिकार जैसे विशिष्ट अपराधों को नियंत्रित करने के लिए गठित विशेष ऑपरेशन समूह के प्रभारी थे। 25 सितम्बर 2019 को रात 8ः15 बजे पुलिस स्टेशन को सूचित किया गया कि वन तस्कर जंगल में घुस गए हैं और अपनी नापाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इसलिए, वह तवाघाट तपोवन में अपराध के स्थान पर गए। जब वह अपराध के स्थान से लौट रहे थे, भारी बारिश के कारण भूस्खलन में उनका वाहन फंस गया।
इसी दौरान एक पत्थर उनके सिर पर लगा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पति की मृत्यु के कारण, विभाग ने उसकी पत्नी को पारिवारिक पेंशन दे दी। लेकिन विशेष पेंशन देने से इनकार कर दिया था।
विभाग के अनुसार, रूल्स का नियम 3 केवल उन पुलिस कर्मियों पर लागू होता है जो डकैतों या सशस्त्र अपराधी या विदेशी घुसपैठियों या अन्य गतिविधियों में संलग्नता के दौरान से संबंधित ड्यूटी में तैनात होते हैं।
एकल पीठ ने मृतक की पत्नी की तरफ से दायर उस याचिका को अनुमति दे दी थी, जिसके तहत उसने विभाग के निर्णय को चुनौती दी थी और राज्य को विशेष पेंशन देने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चैहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि,याचिकाकर्ता के पति असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करने के लिए विशेष ड्यूटी पर तैनात थे। अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के बाद वापस लौटते हुए याचिकाकर्ता के पति की मौत हो गई थी।
इस प्रकार, स्वाभाविक रूप से, विशेष पेंशन प्राप्त करने के लिए याचिकाकर्ता का दावा रूल्स के नियम 3 और सरकार के 19 अगस्त 1988 के आदेश के तहत के स्पष्ट रूप से कवर होता है। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी ने जंगल तस्करों या शिकारियों के कारण होने वाले खतरे से निपटने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी।
