पुलिसकर्मियों को जेल सुपरिटेंडेंट के रूप में नियुक्ति पर नैनीताल हाईकोर्ट ने दिया ये फैसला

पुलिसकर्मियों को जेल सुपरिटेंडेंट के रूप में नियुक्ति पर नैनीताल हाईकोर्ट ने दिया ये फैसला

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैदियों के अधिकार से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पुलिस कर्मियों को जेल सुपरिटेंडेंट के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चैहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एक खंडपीठ ने कहा कि हम कैदियों के सुधार और पुनर्वास के युग में आ गए हैं।

कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस का उद्देश्य जेल अधीक्षकों से बहुत अलग है और स्वभाव के तौर पर उनकी टेªनिंग और मानस अलग-अलग हैं। इसलिए पुलिस कर्मी जेल अधीक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि, पुलिस का उद्देश्य सुधार करना या पुनर्वास करना नहीं है बल्कि अपराध को रोकना और अपराधियों को दंडित करना है। इसलिए पुलिस कर्मियों का प्रशिक्षण एक अलग उद्देश्य और कानून द्वारा निर्धारित लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है।

इस प्रकार पुलिस प्रशासन और जेल प्रशासन के कामकाज में काफी अंतर है। इसके साथ ही पुलिस कर्मियों और जेल कर्मियों की मनोविज्ञान और प्रशिक्षण में भी काफी अंतर पाया जाता है। कोर्ट राज्य सरकार के एक आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पुलिस विभाग के अधिकारियों को सितारगंज, हल्द्वानी, हरिद्वार, देहरादून और रुड़की में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जेल अधीक्षक के कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में राज्य के आदेश को अवैध घोषित करते हुए जेल कर्मियों का चयन करने की आवश्यकता पर जोर दिया और साथ ही सेवा में शामिल होने से पहले कठोर प्रशिक्षण प्रदान करने और बाद में पूर्णकालिक नियमित नियुक्ति पर जोर दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *