देहरादून। प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट महासंघ ने गुरूवार (23 सितम्बर) को फार्मेसी संवर्ग के अस्तित्व बचाने के लिए एकता बिहार धरना स्थल से स्वास्थ्य महानिदेशालय तक मानव श्रंखला रैली निकाली। महासंघ लगातार पिछले 37 से दिनों से अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर संघर्षरत् है।
महासंघ, आईपीएचएस मानको में शिथिलता बरतने समेत दूसरी मांगों को लेकर सरकार पर चौतरफा दबाव बना रहा है। 24 सितम्बर यानि शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि फार्माेसिस्टों की मांगों का ये मामला 24 सितम्बर को केबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। लेकिन महासंघ के पदाधिकारियों में इसको लेकर संशय बना हुआ है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महादेव गौड़ ने बताया कि कि महासंघ ’19 अगस्त, 2021’ से फार्मेसी संवर्ग के अस्तित्व को बचाने एवं नियुक्ति के लिए लगातार धरने पर है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को फार्मासिस्टों की मांगों को कैबिनेट में लाने को निर्देशित किया है। महासंघ को पूरा भरोसा है कि सरकार आईपीएचएस मानकों पर शिथिलता प्रदान करेगी और प्रदेश के 21 हजार बेरोजगार फार्मासिस्टों के साथ न्याय करेगी।
गौरतलब है कि प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट महासंघ वर्ष 2005-06 में उपकेन्द्रो पर सृजित फार्मासिस्ट के 536 पर आइपीएचएस मानकों में शिथिलता प्रदान करते हुए यथावत रखने, रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने 600 उपकेन्द्रों पर संविदा के आधार पर की जा रही भर्ती के बजाय नियमित भर्ती करने, 1368 स्वास्थ्य उपकेन्द्रों पर फार्मासिस्ट के पद सृजित करने, राजकीय मेडिकल कालेजों में फार्मासिस्ट संवर्ग, पशु सेवा केन्द्रों एवं पशु चिकित्सा फार्मासिस्ट के बजाय आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से दवा वितरण के प्रस्ताव पर रोक लगाने, सभी मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता, कारागार विभाग में फार्मासिस्ट की लिखित परीक्षा निरस्त करने, वन विभाग में फार्मासिस्ट के पदो का सृजन, प्रस्तावित भेषज सेवा नियमावली में संशोधन, फार्मासिस्ट संवर्ग का पुनगर्ठन की मांग को लगातार संघर्षरत है।

