श्रीनगर। श्रीनगर की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ने वाला है। एक बार फिर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और नगर पालिका अध्यक्ष पूनम तिवारी के बीच सियासी जंग छिड़ने वाली है। उनकी ये जंग आगामी विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित करेगा। रावत और तिवारी के बीच लम्बे समय से शीत युद्ध चल रहा है। कैबिनेट मंत्री और नगरपालिका अध्यक्ष बीच जारी रस्साकसी के चलते इस बार बैकुंठ चुतुर्दशी का मेला भी प्रभावित रहा।
अब श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने अनजाने में उनके इस शीतयुद्ध के बीच आग में घी डालने का काम कर दिया है। जिससे साफ हो चला है कि श्रीनगर में राजनीतिक संग्राम होना तय है जिसका खामियाजा प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री को चुकाना पड़ सकता है।
दरअसल श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की बी०एड० प्रवेश परीक्षा आगामी 26 नवम्बर को आयोजित होनी है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो० एम०एस०पंवार इस परीक्षा के आयोजन को लेकर खासा उत्साहित है। वह इसलिए भी कि कुलसचिव के तौर पर उनके नेतृत्व में पहली परीक्षा आयोजित की जा रही है।
कुलसचिव ने परीक्षा आयोजन से लेकर सभी तैयारियों पर अपनी नजरें बनाई रखी है। लेकिन उनकी तैयारियों पर तब ग्रहण लगा जब प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ० धन सिंह रावत ने श्रीनगर में बी०एड० प्रवेश परीक्षा के लिए पहले से निर्धारित परीक्षा केन्द्र को तत्काल बदलने को कहा।
दरअसल श्रीनगर में विश्वविद्यालय द्वारा तय किया गया परीक्षा केन्द्र उच्च शिक्षा मंत्री की धुर राजनीतिक विरोधी और नगर पालिका अध्यक्ष पूनम तिवारी के पति प्रदीप तिवारी द्वारा संचालित स्कूल है। जब प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री को मालूम हुआ कि उनके खासम खास गढ़वाल विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए कुलसचिव ने उनके राजनीतिक विरोधी के स्कूल को बी०एड० प्रवेश परीक्षा का केन्द्र बना दिया तो उन्होंने अपने मातहत को उलहाना दिया कि तत्काल परीक्षा केन्द्र को रद्द किया जाय।
विभागीय मंत्री के फरमान को सर माथे पर रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने आनन-फानन में परीक्षा केन्द्र रद्द कर श्रीनगर में सरस्वती विद्या मंदिर को नया परीक्षा केन्द्र बना दिया। उच्च शिक्षा मंत्री के राजनीति विद्वेष के चलते पूर्व में निर्धारित बी०एड० परीक्षा केन्द्र को बदल दिया गया और बिना किसी तैयारी के दूसरा केन्द्र निर्धारित कर दिया गया।
ऐसे में बी०एड० परीक्षा केन्द्र को लेकर छात्र-छात्राओं में भी असमंजस की स्थिति बन गई है तथा छात्रों को परेशानी होने की पूर्ण संभावना है। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय पहले ही अपने कारनामों के लिए विख्यात है ऐसे में कुलसचिव के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा कराया गया यह कार्य हास्यास्पद है।
