देहरादून। गजब खेल श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर पितांबर प्रसाद ध्यानी द्वारा नोट सीटों में कुलसचिव के हस्ताक्षर करवा कर विश्वविद्यालय में पूर्व में हटाए गए अनुशासनहीन कर्मचारियों को बिना किसी नियुक्ति पत्र, बिना किसी कार्रवाई के विश्वविद्यालय में 15-15 दिनो के लिए नियुक्ति दी गई।, जो श्रम विभाग के नियमों के भी विरुद्ध है। हाल यह रहा की कुलपति द्वारा कई अभ्यर्थियों को बिना किसी कारण के नियुक्ति प्रदान नहीं की गई तथा अधिकतम उन्हीं लोगों को नियुक्तियां प्रदान की गई जिन लोगों ने विश्वविद्यालय के खिलाफ 15 दिन तक हड़ताल जारी रखी गयी। अब आलम यह है कि कर्मचारी बिना किसी उपस्थिति के तथा बिना किसी आदेश के विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नियमों को ताक पर रखकर कुलपति द्वारा अनुशासनहीन में कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद वर्ष 2019 में पूर्व कुलपति द्वारा लगभग 40 कर्मचारियों को विश्वविद्यालय से हटाया गया था। कुछ कर्मचारियों द्वारा उच्च न्यायालय मैं वाद दायर भी किया गया है फिर भी कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय के खिलाफ कोर्ट गए कर्मचारियों को विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्रदान की गई है। जिस पर न्यायालय स्तर से कार्रवाई की जानी है। हाल ही में लगाए गए कर्मचारी वरुण मनोहर डोभाल, जितेंद्र रावत, अनिल सिंह मुकेश सिंह, रीता जोशी आदि लगभग 30 कर्मचारियों का वेतन भुगतान विश्वविद्यालय द्वारा किया जाना है।
लगभग 3 महीने का समय व्यतीत होने के बाद भी कार्मिकों को वेतन नहीं मिल पाया जिससे कर्मचारियों ने नेताओं के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से वेतन भुगतान हेतु गुहार लगानी शुरू कर दी है।
लगातार विवादों में रहने वाले कुलपति तथा अपने विरुद्ध शासन स्तर पर झेल रहे जाचो के बाद भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर तथा राजभवन स्तर पर कुलपति ध्यानी के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

