देहरादून। कैंट विधानसभा में कांग्रेस नेता सूर्यकांत बढ़ते जनाधार से विरोधियों के पेशानी में चिंता की लकीरें नजर आने लगी है। प्रेमनगर हो या बिंदाल से जुड़ा गोविन्दगढ़ का इलाका जहां भी सूर्यकांत घस्माना जनसम्पर्क के लिए निकलते उनके साथ समर्थकों का बड़ा हुजुम उमड़ पड़ता है।
कैंट क्षेत्र में सत्ताधारी बीजेपी परिवारवाद के खिलाफ धड़ो में बंटी हुई। वहीं पूरे प्रदेश के साथ-साथ कैंट में भी सत्ता विरोधी लहर चरम पर है। बता दें कि कैंट से भाजपा के नेता हरबंश कपूर लगातार दो बार से विधायक रहे है। कैंट विधानसभा को राजनीति के जानकार अभी तक भाजपा का मजबूत किला बताते रहे। लेकिन इस बार यहां समीकरण बदल गये हैं। दरअसल भाजपा ने पूर्व विधायक हरबंश कपूर के निधन के बाद यहां से उनकी पत्नी सविता कपूर को टिकट दिया है। जिससे भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओ में असंतोष है। सालों से टिकट की बाट जोह रहे दूसरी पांत के नेता हरबंश कपूर की पत्नी सविता कपूर को टिकट दिये जाने से खासे नाराज हैं।
पार्टी टिकट की लाईन में सालों से खड़े भाजपा नेता दिनेश रावत इस बार बगावत कर निर्दलीय बल्ला उठाकर चुनाव मैदान में आ गये हैं। वे कहते हैं कि वे परिवारवाद के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं। कैंट से टिकट ना मिलने से मायूस एक दूसरे भाजपा नेता का तो यहां तक कहते है कि ‘लगता है कि हम बुर्जुर्गो के आशीर्वाद के तले ही दफन हो जायेंगे। वे कहते हैं कि यहां पर परिवारवाद इसी तरह हावी रहा तो भाजपा कार्यकर्ताओ को एक ही परिवार के लिए झण्डा-डण्डा भोगना पड़ेगा।
कैंट क्षेत्र में लोगों के बीच भाजपा शासन को लेकर काफी नाराजगी दिखाई देती है। गोविंदगढ़ में जूते की दुकान चलाने वाले स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि ‘कैंट में इस बार सूर्योदय होगा’। वे कहते हैं कि भाजपा का शासन जनता देख चुकी है। पिछले दो बार से कैंट ने भाजपा प्रतिनिधि को विधानसभा भेजा लेकिन कैंट विधानसभा की सूरत जस की तस है। यहां हर साल बिंदाल नदी में बाढ़ आती है लेकिन इसके लिए अभी तक को स्थायी समाधान भाजपा सरकार नहीं कर पाई है।
प्रेमनगर में किराना की दुकान चलाने वाले एक व्यापारी बताते हैं कि पंजाबी समाज आजादी के समय से यहां है लेकिन उनको आज तक उनकी दुकान-मकानों का हक नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि सूर्यकात धस्माना हमेशा उनकी समस्याओं को उठाते रहे हैं। हमारा वोट उसी को है जो हमारी समस्याओं को समझता है।
कैंट विधानसभा की बात करें सो इसे मिनी भारत कहा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस क्षेत्र में मलिन बस्तियां हैं तो बसंत बिहार, बिजय पार्क इन्दिरा नगर जैसे हाई सोसाइटी भी हैं। इस क्षेत्र में आईएमए और ओएनजीसी, वाडिया इंस्टीट्यूट जैसे प्रख्यात संस्थान भी हैं।
कैंट विधान सभा की बात करें तो 2012 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई। 2012 में हुए पहले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हरबंश कपूर यहां से पहली मर्तबा चिधायक चुनकर आये। साल 2017 में एक बार भी हरबंश कपूर भाजपा के टिकट पर यहां से चुनावी मैदान में उतर जहां उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार सूर्यकांत धस्माना को शिकस्त कर देकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।

कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना की बात करें तो उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक शुरूआत की। वे देहरादून की नामी डीएवी महाविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष रहे। प्रदेश की राजनीति में वे एक बड़े नाम है। जनसंघर्षो को लेकर उन्हें हमेशा सड़कों में देखा जा सकता है। लेकिन इस राजनीति का तकाजा कहा जा सकता है कि जनसंघर्षो की आवाज बुलंद करने वाले ये नेता अभी तक विधानसभा में पहुंच नहीं पाये।
आदर्श सभा के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सेनवाल कहते हैं कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना एक विजनरी नेता है। जनमुद्दो को लेकर वे हमेशा संघर्ष करते रहे हैं। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान सूर्यकांत धस्माना जनता की सेवा में लगे रहे। सबसे बड़ी बात क्षेत्र और प्रदेश के विकास के लिए उनके पास नीति और नीयत दोनों है। इस बार क्षेत्र की जनता ने कैंट में सूर्योदय का मन बना लिया है।
