देहरादून। उत्तराखण्ड में चुनाव सम्पन हो चुके है। नई सरकार के लिए नतीजे आने अभी बाकी हैं। लेकिन राजनीतिक बयानबाजी का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। इस बार राजनीतिक बयानबाजी के केन्द्रबिंदु भी हमेशा की तरह पूर्व सीएम हरीश रावत बने हुए हैं। हरीश रावत इन दिनों उनके एक बयान को लेकर अपनों और विरोधियों के निशाने पर हैं।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने मंगलवार को साफ कहा कि हरीश रावत या तो सीएम ही हो सकता है अन्यथा घर ही बैठ सकता है। इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। मालूम हो कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। हालांकि रावत कैंप शुरू से रावत को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी करता आ रहा है।
रणजीत सिंह रावत ने कहा कि सपने तो हर कोई देखता है… ‘यदि होता किन्नर नरेश मैं राजमहल में रहता, सोने का सिंघासन होता सर पर मुकुट चमकता।’
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत ने हरीश रावत के सीएम बनने के बयान पर तंज कसते हुए कहा है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह हाईकमान तय करेगा ? रणजीत रावत ने कहा कि चुने हुए विधायक विधानमंडल दल के नेता का नाम तय कर हाईकमान को भेजेंगे. उसके बाद ही हाईकमान तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा?
मुख्यमंत्री वाले बयान पर नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि-हरीश रावत जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं, मैं उन पर टिप्पणी करूं, यह कदापि उचित नहीं है। राष्ट्रीय-नेतृत्व ने तय किया था कि हम सामूहिक रूप से चुनाव लड़ेंगे और परिणाम के बाद जब हम सरकार बनाने जाएंगे तो कांग्रेस विधान मंडल और राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि किसे रुमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिसे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, सभी उसके साथ लामबंद होने का कार्य करेंगे।
उधर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान पर भाजपा लगातार उनको घेरने का काम कर रही है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भी हरीश रावत के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें हरीश रावत ने या तो मुख्यमंत्री बनने की बात कही थी या फिर घर बैठने की बात कही थी।
सुबोध उनियाल का कहना है कि वह दो-तीन साल पहले ही हरीश रावत को घर बैठने की सलाह दे चुके हैं, लेकिन अब लगता है कि हरीश रावत को उनकी सलाह सही लग रही है। इसीलिए वह इस तरह की का बयान दे रहे हैं, कि वह घर बैठने वाले हैं।
