संघर्षों से भरा है गायक गीताराम कंसवाल का जीवन

संघर्षों से भरा है गायक गीताराम कंसवाल का जीवन

कीर्तिनगर। विकास खंड भिलगना के गौजियाणा के साधारण परिवार मे जन्मे गीता राम कंसवाल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। गीतकार गीताराम ने अपनी प्राथमिक शिक्षा इंद्रोला गांव से पूरी करते हुई आगे की उच्च शिक्षा देहरादून से पूरी की। गीता राम बताते है की संगीत के प्रति उनकी रूचि बचपन से थी तेरह वर्ष की आयु से ही उन्होंने गाना शुरू किया।

उनका जीवन संघर्षाे से भरा रहा। सडक दुर्घटना मे उन्हें अपना एक हाथ भी गवाना पड़ा, किन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते रहे। गीता राम संगीत के साथ साथ क़ृषि बागवानी के कार्यों मे भी रूचि रखते है उनकी रूचि अपने गांव क्षेत्र जल जंगल जमीन और पलायन जैसे समस्यावो का दंश झेल रहा उत्तराखंड क़े प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की है।

कंसवाल बताते है की उन्होंने 1999 मे एल्बम निकाली किन्तु उन्हें खासी निराशा हाथ लगी। जन मानस ने उन्हें पसंद नहीं किया किन्तु बार बार असफल होने पर भी उन्होंने अपने आप को हताश नहीं होने दिया। फिर वो दौर आया जब उनका गीत ‘छोटी स्याली मेरी उदीना’ आया जिसको लोगो ने बहुत ज्यादा पसंद किया। इसके बाद उनके सुपरहिट गाने हे कांछी मेरी रामकली, मैं दर्जा पास तू बारहवीं पास, लोगो के दिलो मे बस गए।

कंसवाल ने बताया की उन्हें जागर गाना भी बहुत पसंद है उन्होंने भैरों बाबा, घंडियाल देवता, राजराजेश्वरी जागर भी गाये। गीता राम ने बताया की उनका हाल मे ही आया गीता वर्षाे की अठारह एक मार्मिक गीत है। क्यूंकि अल्प आयु मे माता पिता लड़की की शादी कर देते है जिसके कारण उस लड़की के सपने टूट जाते है उस संवेदना को उन्होंने अपने इस गीत मे उजागर किया है।

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