भ्रष्टाचार के विरूद्ध, धाकड़ धामी का युद्ध, अब तक 38 आरोपी सलाखों में

भ्रष्टाचार के विरूद्ध, धाकड़ धामी का युद्ध, अब तक 38 आरोपी सलाखों में

देहरादून। उत्तराखण्ड के 22 साल के इतिहास में पहली मर्तबा भ्रष्टाचार के मामले में 38 लोग सलाखों के पीछे हैं। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई हो चुकी है। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार की अमरबेल ने राज्य बनने के बाद से जड़े फैलानी शुरू कर दी थी। लेकिन प्रदेश के युवा सीएम पुष्कर धामी ने भ्रष्टाचार की इस जड़ को उखाड़ फेंकने का अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए आरोपियों को उनके सही ठिकाने पर भेजना शुरू कर दिया है। उनका साफ कहना है कि भ्रष्टाचार का आरोपी कितना रसूखदार क्यों ना हो उन पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

एसटीएफ को सौंपी पेपर लीक की जांच

प्रदेश के बेरोजगार लम्बे समय से यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में शिकायत दर्ज करा रहे थे। उनकी बात कहीं नहीं सुनी जा रही थी। इस मामले को लेकर जब बॉबी पंवार की अगुवाई में बेरोजगार संगठन के नौजवान सीएम धामी के पास पहुंचे। तो सीएम धामी ने मामले को गंभीरता को समझते हुए तुरन्त इस पर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। और मामले की जांच उत्तराखण्ड स्पेशल टॉस्क फोर्स की सौंपी। जिसे पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने यूकेएसएससी पेपर लीक और अन्य भर्तियों में धांधली का खुलासा करते हुए अब तक 38 लोगों को अरेस्ट किया है। वहीं जांच अभी जारी है।

सचिव बडोनी को किया निलम्बित

सीएम धामी ने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में सचिव रहे संतोष बडोनी समेत सचिवालय में कार्ररत् दो कार्मिकों को निलम्बित कर दिया है। बेरोजगार संगठन लगातार सचिव संतोष बडोनी पर भर्ती मामले को लेकर आरोप लगा रहे थे। अध्यक्ष एस० राजू का पहले ही अपना इस्तीफा दे चुके है।

विधानसभा बैकडोर भर्ती को लेकर स्पीकर को लिखा पत्र

विधानसभा बैकडोर भर्ती प्रकरण में भी सीएम धामी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी को इस पर जांच कमेटी बिठाने का अनुरोध किया। जिस पर कार्रवाई करते हुए स्पीकर ऋतु खण्डूडी ने बैकडोर भर्ती मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है जो तीस दिन में अपनी रिपोर्ट देगा।

अन्य भर्तियों पर भी बिठाई जांच

सीएम धामी ने एक तरह से भ्रष्टाचार के विरूद्ध युद्ध का ऐलान कर दिया है। यूकेएसएसएससी पेपर लीक सहित तमाम अन्य भर्तियों की जांच के साथ अब साल 2015-16 में हुई कुल 356 सब-इंस्पेक्टर भर्ती की जांच भी शुरू हो गई है। दारोगा घोटाले में इन्वेस्टिगेशन के लिए विजलेंस की टीम गठित कर दी है। एसएटीएफ को पेपर लीक केस में कुछ ऐसे सबूत को मिले थे। मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद दरोगा भर्ती की जांच के आदेश विजिलेंस को दे दी गई है।

इस बीच वन दरोगा भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े सामने आ गया है। नकल माफियाओं के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के तहत ऑनलाइन वन दरोगा भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के संबंध में को मुकदमा दर्ज किया है। इसकी जांच भी एसटीएफ को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार को ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति से कोई समझौता न करने की बात दोहराते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई भी अनियमितता पाए जाने पर इनमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

नकल माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के हौसले हुए पस्त

सीएम धामी की भ्रष्टाचार के विरूद्ध कार्रवाई से राज्य में नकल माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के हौंसले पस्त हैं। भर्ती धांधली में शामिल आरोपियों पर एसटीएफ का लगातार शिकंजा बढ़ता रहा है। इसके साथ ही यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में पूर्व में गिरफ्तार चार अभियुक्तों की जुडिशल रिमांड की कार्यवाही भी सचिवालय रक्षक परीक्षा लीक मुकदमे में की गई है। वन दरोगा ऑनलाइन परीक्षा मामले में भी 2 अभियुक्त पहले गिरफ्तार हो चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में इस प्रकार अलग-अलग दर्ज तीन मुकदमों में कुल 38 लोग की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मुख्यमंत्री उत्तराखंड ने निर्देश दिए है कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। इसलिए पेपर लीक मामले में फरार दो अपराधी सादिक मूसा निवासी अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश पर दो लाख का ईनाम और योगेश्वर राव निवासी गाजीपुर उत्तर प्रदेश पर गिरफ्तारी पर एक लाख का ईनाम घोषित किया गया है।

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