सैन्य धाम: बिलौटे को सौंप दी दूध की रखवाली!

सैन्य धाम: बिलौटे को सौंप दी दूध की रखवाली!

– जो आरोपी, वही दे रहा सफाई, नहीं हुई गड़बड़ी
– पेयजल भ्रष्टाचार से दूषित, पंगु बना शासन-प्रशासन

गुणानंद जखमोला

15 अक्टूबर भी बीत गई। सैन्य धाम नहीं बना। तीसरी बार डेट आगे बढ़ाई गयी है। यह प्रोजेक्ट पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है तो इसका यह हाल है। प्रदेश के बाकी प्रोजेक्ट्स किस हाल में होंगे? सीएम धामी कह-कह कर थक गये कि काम पूरा करो। सैनिक (अपना) कल्याण मंत्री गणेश जोशी सैन्य धाम का दौरा करते हैं। फोटो सेशन होता है और गणेश मीडिया दूसरे दिन उनकी तस्वीर के साथ खबर देता है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा। पर सैन्य धाम में जो अनियमिताएं हुई हैं, उसकी कोई जांच हुई या नहीं, नहीं पता। पीएमओ और सीबीआई के लेटर पर कार्रवाई की बात भी कहीं अता पता नहीं।

तड़ीपार से लौटे आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने जब सैन्य धाम की गड़बड़ी संबंधी जांच के संबंध में आरटीआई लगाई तो जवाब सैन्य धाम निर्माण कार्य के उसी प्रोजेक्ट मैनेजर रविंदर ने दिये जो खुद आरोपी है। बताओ, कोई आरोपी स्वीकार करेगा कि उसने गोलमाल किया है? इस मामले में स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच समिति क्यों नहीं गठित की गयी? यह बड़ा सवाल है। क्या सरकार 15-20 लाख रिश्वत देकर नौकरी पर लगे क्लर्क को 10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार कर ही ढोल पीटेगी कि भ्रष्टाचार पर जोरदार प्रहार हो रहा है?

आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने आरटीआई के माध्यम से पूछा कि इस मामले में सीबीआई की संस्तुति और मुख्य सचिव के पत्र पर जांच क्या हुई। जब इस संबंध में सारे सवालों के जवाब परियोजना प्रबंधक रविंदर कुमार ने दिये जो कि खुद आरोपों के घेरे में है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार रविंदर कुमार ने जवाब दिया कि ई टेंडरिंग में महज दो ही कंपनियों ने भाग लिया इसके जवाब में कहा गया है इस कार्य के लिए ई-टेंडरिंग अपनाई गयी और चुनौतीपूर्ण कार्य होने से महज दो ही कंपनियों ने भाग लिया। कार्य समय पर पूर्ण करना था, इसलिए अल्पकालीन टेंडर आमंत्रित किये गये। टेंडर के मुताबिक सैन्य धाम निर्माण नवम्बर-दिसम्बर 2023 में होना था लेकिन एक साल बाद भी यह कार्य नहीं हो सका।

वित्त निदेशक की आपत्ति कि बिना शासन की अनुमति के तकनीकी बिड क्यों खोली गयी? इसका जवाब फिर वही दोहराया गया कि कार्य महत्वपूर्ण था। दो बार निविदा में दो ही ठेकेदार क्यों? के जवाब में कहा गया कि कार्य विशेष प्रकृति का था। ऐसे में अल्पकालीन निविदा ही जारी की गयी। परियोजना प्रबंधक रविंद्र कुमार ने अपने तबादले और सैन्य धाम की फाइलें अपने साथ ही घूमने के लिए देहरादून लाने के सवाल का जवाब दिया है कि तबादले से सैन्य धाम का निर्माण कार्य प्रभावित होता। सैन्यधाम की लागत 49 करोड़ से बढ़कर 99 करोड़ होने की जानकारी मांगने पर परियोजना प्रबंधक ने जवाब दिया है कि जमीन दोगुणी हुई है तो लागत भी बढ़ गयी। पहले दो हेक्टयर की बजाए 4 हेक्टयर जमीन में सैन्य धाम निर्माण होगा। ठेकेदार द्वारा लागत की दरों के संबंध में कहा गया है कि तय मानकों के अनुसार ही भुगतान होगा। बिल के भुगतान की जानकारी को मिथ्या आरोप कहा गया है। इसके अलावा सैन्य धाम के डिजाइन में बदलाव को भी मिथ्या आरोप बताया गया है।

एडवोेकेट नेगी ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जिससे प्रदेश की आम जनभावना जुड़ी हुई। उसकी जांच ही नहीं हो रही है। सीबीआई और पीएम आफिस से चिट्ठी मिलने पर कोई जांच नहीं बिठाई गयी और आरोपी परियोजना प्रबंधक रविंदर ही जवाब दे रहा है तो फिर सच कैसे उजागर होगा।

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