लोन लेने वालों की बढ़ेगी टेंशन! दिसंबर में रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है ब्याज दरें, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

RBI दिसंबर में महंगाई रोकने के लिए रेपो रेट 0.50% बढ़ाकर 6% कर सकता है, जिससे लोन महंगे होने की संभावना है.

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले दिसंबर महीने में आम जनता और बाजारों को एक बड़ा झटका दे सकता है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ रही महंगाई और देश से बाहर जा रहे विदेशी फंड्स को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की भारी बढ़ोतरी कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो देश में रेपो रेट बढ़कर सीधे 6 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा.

अक्टूबर नीति से ही मिलने लगे थे कड़े संकेत
एसबीआई रिसर्च की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति से ही आरबीआई के रुख में बदलाव दिखने लगा था. केंद्रीय बैंक ने तब रेपो रेट को 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया था, जो इस बात का सीधा संकेत था कि आने वाले दिनों में मौद्रिक नीति और सख्त होने वाली है. वर्तमान आर्थिक स्थितियों को देखते हुए अब आरबीआई के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं– या तो वह ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करे या फिर कुछ समय के लिए इस पर रोक लगा दे.
नवंबर में चरम पर हो सकती है महंगाई

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल नवंबर महीने में देश में महंगाई दर 6.8 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है. इसी को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक दिसंबर की बैठक में आक्रामक रुख अपनाते हुए ‘जम्बो’ हाइक का फैसला ले सकता है. हालांकि, ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी आगे चलकर इस बात पर भी निर्भर करेगी कि देश में महंगाई की रफ्तार क्या रहती है और दुनिया भर के बाजारों में क्या हालात बनते हैं.

रुपये को बचाने के लिए एसबीआई ने दिए बड़े सुझाव
अमेरिकी डॉलर के लगातार मजबूत होने की वजह से भारतीय रुपया पिछले पांच महीनों के निचले स्तर पर आ गया है. केवल सितंबर के महीने में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय कर्ज बाजार से करीब 2.1 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम बाहर निकाल ली है. इस गिरावट को थामने के लिए एसबीआई रिसर्च ने कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं:

  • लॉन्ग टर्म टैक्स में बदलाव: विदेशी निवेशकों को लंबे समय तक भारतीय बाजार में बनाए रखने के लिए 3 साल से ज्यादा समय के निवेश पर टैक्स (LTCG) का एक नया ढांचा तैयार किया जाए.
  • निर्यात नियमों में सख्ती: विदेशों से होने वाली कमाई को भारत वापस लाने की समय सीमा को 9 महीने से घटाकर 6 महीने किया जाए.
  • लिक्विडिटी मैनेजमेंट: बाजार में पैसों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को छेड़ने के बजाय परंपरागत ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) का सहारा लिया जाए.

जीडीपी और महंगाई पर आरबीआई की नजर
इन तमाम चुनौतियों के बीच राहत की बात यह है कि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि सालाना महंगाई दर 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. बदलती परिस्थितियों में अब हर किसी की नजरें दिसंबर में होने वाली आरबीआई की अगली बैठक पर टिकी हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *