वैशाली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में 13 बच्चों की मौत की पुष्टि जिलाधिकारी ने की है, जबकि सात बच्चों को सुरक्षित बचाकर पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे गंगा नदी के दूसरी ओर एक श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान बीच नदी में नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों, गोताखोरों और प्रशासन की टीमों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। लापता लोगों की तलाश के लिए सुबह दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे बच्चे
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, रामपुर श्यामचंद के एक टोले के बच्चे नदी पार कर सिंहेश्वर राय के घर आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि नाव छोटी और जर्जर थी तथा उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इसी वजह से नाव का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय लोगों ने बताया कि नाव में करीब 15 से 20 लोग सवार थे। नाव डूबने के बाद ग्रामीणों ने तत्काल बचाव की कोशिश की और उपलब्ध संसाधनों की मदद से लोगों को बाहर निकाला। हादसे में कई परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया।
एक ही परिवार की सात बच्चियों की मौत
इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतकों में छह से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चे शामिल बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में सात बच्चियां एक ही परिवार की थीं। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान अंकिता कुमारी, अमृता कुमारी, सुनीता कुमारी, पिंकी कुमारी, आर्यन कुमार, अनीशा कुमारी, मोनू कुमारी, सिंकी कुमारी, मीरा कुमारी, निशु कुमारी, मोहन कुमार, सोनम कुमारी और नमन कुमार के रूप में बताई गई है।
जर्जर नाव को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने नाव की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाव की जर्जर हालत के बारे में पहले भी संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई थी, लेकिन कथित तौर पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार, हादसे के बाद लोगों को बचाने के लिए खाट और रस्सियों तक का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि, नाव की स्थिति और हादसे से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सात बच्चों का NMCH में चल रहा इलाज
हादसे में बचाए गए सात बच्चों को पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के मुताबिक, सभी सात बच्चों की हालत स्थिर है। राहत एवं बचाव अभियान में एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद ली गई। हादसे के बाद मृतकों के शव गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों में शोक का माहौल बन गया। शवों के पोस्टमार्टम को लेकर भी परिजनों और प्रशासन के बीच स्थिति तनावपूर्ण होने की जानकारी सामने आई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख, मुख्यमंत्री ने दिए चार-चार लाख रुपये
गंगा नदी में हुए इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता में जुटा है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी घटना पर शोक जताते हुए अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा।
हादसे के बाद गांव में मातम
एक साथ कई बच्चों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है। जिन घरों में कुछ समय पहले तक बच्चों की चहल-पहल थी, वहां अब मातम पसरा है। ग्रामीणों ने नावों की सुरक्षा, क्षमता के अनुसार यात्रियों को बैठाने और नदी पार करने के दौरान जरूरी सावधानियां सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य जारी रहने की जानकारी दी गई है। हादसे के कारणों और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
