उपशीर्षक: करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ 200 मीटर लंबा पुल और 900 मीटर से अधिक लंबी सुरंग, सीएम धामी ने किया निरीक्षण; संगम लाइब्रेरी को 150 पुस्तकें भी दीं
रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में रुद्रप्रयाग में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना तैयार हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अलकनंदा नदी पर बने पुल और सुरंग का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की जानकारी ली। इस परियोजना पर करीब 156 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पुल-सुरंग मार्ग पर ट्रायल के आधार पर आवागमन भी शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा।
केदारनाथ-बदरीनाथ जाने के लिए मिलेगा वैकल्पिक मार्ग
चारधाम सड़क परियोजना के तहत तैयार इस मार्ग में अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। संपर्क मार्ग सहित इसकी कुल लंबाई करीब 1.18 किलोमीटर है। यह परियोजना केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगी। मार्ग पर नियमित यातायात शुरू होने के बाद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को रुद्रप्रयाग बाजार से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम होने और जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों के साथ ही चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है। सड़क संपर्क बेहतर होने से पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित स्थानों में चल रहे कार्यों की जानकारी भी ली। इन क्षेत्रों में ढलानों को स्थिर करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए काम किया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन के खतरे को कम करना और यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित बनाना है। चारधाम यात्रा के दौरान पर्वतीय सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने के मद्देनजर इन कार्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संगम लाइब्रेरी में 2,500 से अधिक पुस्तकें
रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के तहत संचालित संगम लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना और पुस्तकालयों को समृद्ध बनाना है। प्रशासन के अनुसार, संगम लाइब्रेरी को अब तक 2,500 से अधिक पुस्तकें मिल चुकी हैं। इनमें सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, साहित्य और अन्य विषयों से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं। मुख्यमंत्री धामी ने भी अभियान के तहत 150 पुस्तकें उपलब्ध कराईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुस्तक दान जैसी पहल उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री की जरूरत होती है। उन्होंने समाज के सहयोग से पुस्तकालयों को समृद्ध बनाने के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
