दिवालीखाल मामलाः क्या हैं डबल लेन सड़क बनाने के मानक? क्यों है इतना हंगामा? पढ़े ये रिपोर्ट

दिवालीखाल मामलाः क्या हैं डबल लेन सड़क बनाने के मानक? क्यों है इतना हंगामा? पढ़े ये रिपोर्ट

गैरसैंण। सोमवार को सड़क चैड़ीकरण को लेकर हुए प्रदर्शन ने प्रदेश में नए ‘आंदोलनजीवियों’ की बिसात की पोल खोल दी है। जिस सड़क के चैड़ीकरण की बात उठाई जा रही है, वो सड़क डबल लेन मानकों में खरी नही उतरती है, बावजूद इसके भी सरकार के मुखिया ने जनहित में इस सड़क को डेढ-लेन सड़क से जोड़ने का ऐतिहासिक निर्णय पहले ही ले लिया है।

अब सवाल इस बात का खड़ा हो गया है कि पहाड़ की राजधानी गैरसैंण में बिना वार्ता किए ये हंगामा क्यों खड़ा हुआ है?
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं एनजीटी द्वारा डेढ लेन सड़क के लिए जो मानक तय किए हैं उन मानकों पर यह रोड़ कहीं भी खरी नही उतरती है। अगर सरकार चाहे तो भी इस लेन को डेढ-लेन में तबदील नही किया जा सकता है।

अगर सरकार ऐसा करती है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और एनजीटी को भी बदलाव करना पडेगा, जो संभव नही है।

दरअसल किसी भी सड़क को डबल लेन बनाने का सबसे जरुरी मानक है की वहां से प्रतिदिन तकरीबन 3,000 गाडियां चलनी चाहिए। इसके साथ ही पर्यावरण, भूस्खलन जैसी तमाम सड़कों का भी अध्ययन भी किया जाता है।

लेकिन घाट नंदप्रयाग वाली इस सड़क से मात्र 300 से भी कम वाहन प्रतिदिन चलते हैं। जिस वजह से सड़क को चैड़ा करने को लेकर शासन-प्रशासन को काफी दिक्कत आ रही है।

घाट आंदोलन की जनभावनाओं को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले महीने अल्मोड़ा प्रवास के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए, सुगम रोड़ का ऐलान किया। जिसमें उन्होंने बताया कि प्रदेश की जनता को सुरक्षित और सुचारु मोटर मार्ग मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता है। जिसके लिए प्रदेश सरकार सभी ब्लॉक मुख्यालयों को अब डेढ़ व डबल-लेन से जोडेगी। जिसको लेकर जल्द ही सर्वे और बजट जारी किया जाएगा।

प्रदेश में सड़क निर्माण को लेकर सीएम हाल ही में दिल्ली भी गए थे, जहां उन्होंने केंद्रीय सड़क, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की। जिससे साफ हो गया था कि घाट नंदप्रयाग सड़क मार्ग को डेढ़ लेन से जोड़ा जाएगा।

बड़ी साजिश, आंदोलन में घुसे उपद्रवी, शांतिपूर्ण आंदोलन को किया बेकाबू

पिछले काफी दिनों से शांतिपूर्ण चल रहे प्रदर्शन ने अचानक उग्र रुप तब ले लिया जब ग्रामीणों के बीच राजनीतिक दल शामिल हो गये। ग्रामीण हरि प्रसाद सेमवाल ने बताया सुबह से ही कांग्रेस और यूकेडी के कुछ कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी और पथराव को लेकर ग्रामीणों को उकसाया।

विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश में कई ऐसे तत्व भी सक्रिय हो गए हैं जो चुनी हुई सरकार को गिराने में तुले हुए हैं। इनमें कुछ राजनीतिक पार्टियों भी शामिल हैं। सीएम त्रिवेंद्र कई मिथकों को तोड़ प्रदेश के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। बस यही बात कही लोगों को खटक रही है।

पिछले काफी दिनों से शांतिपूर्ण चल रहे प्रदर्शन ने अचानक उग्र रुप तब ले लिया जब ग्रामीणों के बीच राजनीतिक दल शामिल हो गये। ग्रामीण हरि प्रसाद सेमवाल ने बताया सुबह से ही कांग्रेस और यूकेडी के कुछ कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी और पथराव को लेकर ग्रामीणों को उकसाया।

विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश में कई ऐसे तत्व भी सक्रिय हो गए हैं जो चुनी हुई सरकार को गिराने में तुले हुए हैं। इनमें कुछ राजनीतिक पार्टियों भी शामिल हैं। सीएम त्रिवेंद्र कई मिथकों को तोड़ प्रदेश के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। बस यही बात कही लोगों को खटक रही है।

25 हजार करोड़ से होगा राजधानी गैरसैंण के आस-पास का विकास

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर सीएम रावत 25 हजार करोड़ रुपये का पैकेज घोषित कर चुके हैं। सीएम ने पिछले साल राज्य स्थापना दिवस (9 नवंभर) को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से 25 हजार की सौगात चमोली जनपद के विकास के लिए दे चुके हैं।

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