देवस्थानम् बोर्ड पर पुनर्विचार के सवाल पर पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र ने बोली ये बात

देवस्थानम् बोर्ड पर पुनर्विचार के सवाल पर पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र ने बोली ये बात

देहरादून। इन दिनों प्रदेश में पिछली त्रिवेन्द्र सरकार के दौरान लिए गए फैसले को मौजूदा सरकार द्वारा पलटने की चर्चाएं है। मौजूदा सीएम ने कुर्सी संभालने के बाद कई ऐसे फैसले पलटे है जिसे खुद पार्टी के बड़े नेता और मंत्री ऐतिहासिक बता चुके हैं। इन्हीं में से एक फैसला देवस्थानम् बोर्ड का भी है। जिसको लेकर सियासी हलकों के प्रदेष की जनता के बीच तरह-तरह की बातें हो रही है। कोई त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा देवस्थानम् बोर्ड के गठन को जायज बता रहे हैं तो कोई मौजूदा सीएम तीरथ के फैसलों को सही बता रहे हैं।

सरकार के चार धाम देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते है कि श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ के मंदिर तो बदरी-केदार मंदिर समिति के जरिए एक एक्ट से पहले से ही संचालित होते हैं। इसके तहत 51 मंदिर आते हैं। हमने एक भी नया मंदिर बोर्ड में नहीं जोड़ा।

श्री यमुनोत्री धाम मंदिर को एसडीएम की देखरेख में संचालित किया जाता है। वर्ष 2003 तक श्री गंगोत्री धाम का मंदिर में भी प्रशासक के तौर पर एसडीएम की देखरेख में संचालित होता था। अब किन कारणों से एसडीएम की व्यवस्था बदली उसके लिए पिछला अध्ययन करना पड़ेगा।

पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत बतते है कि देवस्थानम बोर्ड बनाने का उद्देश्य केवल वहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था का संचालन करना था। खुद मंदिर समितियों ने माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर यहां भी बोर्ड बनाने का सुझाव दिया था। यहां तक कि समितियां श्री पूर्णागिरी और श्री चितई के लिए भी ऐसी व्यवस्था चाहते रहे।

जहां तक वर्षों से इन मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे पंडों और पुरोहितों के हक- हकूक की बात है, हमने उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की। क्योंकि पंडा-पुरोहित सैकड़ों वर्षों से इन मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं इसलिए उनके अधिकारों को बनाए रखा गया। केवल यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन किया गया।

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