बीस साल से थी रामनगर से चुनाव लड़ने की ख्वाहिश, पूर्व सीएम हरीश रावत ने कही ये बात

देहरादून। कांग्रेस की उम्मीदवारों की दूसरी सूची में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष पूर्व सीएम हरीश रावत को कांग्रेस ने रामनगर से टिकट दिया है। कांग्रेस के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक काफी मंथन के बाद पार्टी ने ये फैसला लिया है। हालांकि रामननगर से हरीश रावत के राजनैतिक शार्गिद रणजीत सिंह रावत यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। लेकिन पार्टी हाईकमान ने यहां से पूर्व सीएम हरीश रावत पर भरोसा जताया है।

रामनगर से पार्टी के टिकट मिलने के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया में संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि ‘मेरे मन के कोने में बहुत समय से ये आकांक्षा छिपी हुई थी कि मैं कभी रामनगर से चुनाव लड़ू।’

उन्होंने लिखा है कि ‘मैंने अपने राजनैतिक जीवन की अ-आ, क-ख भी रामनगर में ही सीखी। जब मैं इंटर की शिक्षा ग्रहण करने यहां आया तो मेरे राजनीति ट्यूटर सुशील कुमार निरंजन जी, जय दत्त जोशी जी, शिवप्रकाश अग्रवाल जी, विष्णु कामरेड जी, कैलाश जोशी जी, ललित दुर्गापाल जी, कॉमरेड हरिदासी लाल जी जैसे कई लोग थे, जिनके सानिध्य में मैंने बात करना, तर्क करना और कुछ राजनैतिक चीजों पर चिंतन करना प्रारंभ किया जो एक पूंजी के साथ आज भी मेरे काम आ रहा है।’

उन्होंने कहा कि ‘जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने कुछ कार्य पत्रं-पुष्पम् के तौर पर यहां के लिए स्वीकृति किये। बस अड्डे का काम जिस रूप में मैंने स्वीकृत किया था, उस रूप में आगे नहीं बढ़ रहा है। मालधन को जोड़ने वाली सड़क भी जिस तर्ज पर मैंने स्वीकृति की थी, उस तर्ज पर आगे नहीं बड़ी, परंतु डिग्री कॉलेज बन गया।

रामनगर के क्षेत्र के पिछड़ेपन की कशिश उनके मन है। उन्होंने लिखा है कि मैंने कोशिश की थी कि मैं गर्जिया माता के चारों तरफ कुछ ऐसा सुरक्षात्मक कार्य करूँ, कुछ धन हमने स्वीकृत भी किया, खर्च भी हुआ। मगर जैसा मैं चाहता था, वैसा नहीं हो पाया। आज भी मुझे दोनों तरफ, गढ़वाल की तरफ भी और अल्मोड़ा की तरफ भी जाने वाली सड़क की स्थिति बहुत खटकती है। सत्यता तो यह है कि रामनगर से लगा हुआ बेतालघाट, खैरना इधर गुजणु पट्टी होकर के बैजरौ व उससे आगे का इलाका और सल्ट, चिंतोली होकर के गैरसैंण तक का इलाका, भतरौजखान-रानीखेत-अल्मोड़े का इलाका विकास की दौड़ में तुलनात्मक रूप से पीछे है। रामनगर इन क्षेत्रों का केंद्र बिंदु है, रामनगर में इन क्षेत्रों के विकास के ग्रोथ सेंटर होने की पूरी संभावनाएं व क्षमताएं विद्यमान हैं। मेरी आकांक्षा है कि राज्य में ऐसी सरकार बने जो ऐसा कर सके, यह उत्तराखंड के विकास में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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