इश्तहार के फेर में कायदे-कानून को भी भुला बैठा देहरादून का पेस्टलवीड स्कूल

इश्तहार के फेर में कायदे-कानून को भी भुला बैठा देहरादून का पेस्टलवीड स्कूल

देहरादून। अध्यापक की जिम्मेदारी होती है कि उससे पढ़ने आये हर विद्यार्थी को वह सही ज्ञान और शिक्षा दे। उसके लिए अध्यापक को ही सबसे पहले अपने आप में सही होना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में अगर अध्यापक ही खुद बड़ी त्रुटियां करे तो उसका अपने विद्यार्थियों को अच्छा ज्ञान देने की उम्मीदें खत्म हो जाती हैं और इस त्रुटि का असर केवल एक विद्यार्थी नहीं बल्कि पीढ़ियों पर पड़ता है। यह हमने बात की केवल एक शिक्षक के सही होने की जो एक विद्यार्थी को पढ़ाता है। अब अगर कोई शिक्षण संस्थान ऐसी जानलेवा त्रुटियां करे जिसपर अध्यापकों को तैयार करने का जिम्मा हो तो सोचिए क्या वे अध्यापक तैयार कर पाएंगे और क्या वे अध्यापक बच्चों को सही ज्ञान दे पाएंगे।

जी हां, आप फ़ोटो में राजधानी देहरादून के एक निजी कॉलेज की बस देख रहे हैं जो अपने संस्थान में बीएड में एडमिशन लिए विद्यार्थियों को लाने/ले जाने के उपयोग में लगाई जाती है। पेस्टल वीड नाम के इस कॉलेज पर जिम्मेदारी है कि वे अच्छे शिक्षक तैयार करें ताकि वे आगे जा कर विद्यार्थियों को सही ज्ञान दे पाएं। पर ऐसे संस्थान से आप क्या उम्मीद रख पाएंगे जो खुद यातायात के नियमों को इस तरह से अनदेखी कर रहा है कि दूसरे की जान पर बन आये?

संस्थान की बस जो पूरे शहर में घूमती है उसमें न आप बस के ब्रेक लाइट देख पा रहे हैं और न साइड इंडिकेटर। इतना ही नहीं किसी दुर्घटना की स्थिति में कोई पीछे से वाहन का नम्बर नोट भी करना चाहे तो वह भी नहीं कर सकते। ऐसा इस लिए हो रहा है कि यातायात नियमों को ताक में रख कर संस्थान ने अधिक कमाई के लिए पूरी बस को अपने विज्ञापन से ढक दिया है। अब अगर कोई दुपहिया या चौपहिया वाहन इस बस के पीछे चल रहा हो और बस ने ब्रेक मारे या दाएं-बाएं मुड़ने का कोई संकेत दिया तो पीछे चल रहा वाहन किसी दुर्घटना का शिकार हो सकता है।

देहरादून शहर में ई चालान की व्यवस्था भी लागू हो चुकी है। इसके तहत यातायात नियमों का पालन न करने वाले बहनों की शहर में लगे तमाम कैमरों की मदत से फ़ोटो खींची जाती है और वाहन के निम्बर के अनुसार वाहन के पते पर चालान पहुंच जाता है। अब जब नम्बर प्लेट ही ढकी हो तो कैसे ही कार्यवाही हो रही होगी यह भी सोचने योग्य बात हैं। लेकिन इन सब नियम कायदों को भूल कर संस्थान अपनी कमाई ज्यादा कैसे हो सोच कर पूरी बस को प्रचार से ढक कर पूरे शहर में घुमा रहा है।

अब आइये विभागीय गैरजिम्मेदारी वाले रवैये पर। परिवहन विभाग वैसे तो छोटे मोटे कारोबारियों पर इतनी बड़ी कार्यवाही करती है कि उनका काम करना मुश्किल हो जाता है। उनकी छोटीमोटी गलती से उनका परमिट हो या पंजीकरण के कागज सब आर टी ओ चौकिंग के दौरान जमा कर देता है। परन्तु राजधानी की राजपुर रोड जैसे मुख्य सड़क पर जहां कि परिवान विभाग का मुख्य कार्यालय है, सचिवालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी कर्मचारी रोजाना इस सड़क पर आना जाना करते हों वहां यह बस इस स्थिति में सुबह शाम दौड़ती है यह बात समझ से परे हैं।

क्या कहते हैं यातायात के नियम-

नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने पर भारी भरकम जुर्माना वसूला जा रहा है. गाड़ियों के नंबर प्लेट (दनउइमत चसंजम) को लेकर भी नियम कायदे आइये जानते हैं।

ट्रैफिक नियमों में बाइक, थ्री व्हीलर या कार और बस के नंबर प्लेट को लेकर कई तरह के दिशानिर्देश हैं, जिनको फॉलो किया जाना जरूरी है। कई लोग नंबर प्लेट को लेकर लापरवाही दिखाते हैं, लेकिन ऐसा करना आपको मुश्किल में डाल सकता है। अगर आप ट्रैफिक पुलिस के कैमरे से बचने के लिए गाड़ी का नंबर छिपाते हैं तो आपको जेल की सजा हो सकती है। ट्रैफिक पुलिस कैमरे से गाड़ी का नंबर रिकॉर्ड कर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर चालान ओनर के घर भेज देती है। इससे बचने के लिए अक्सर बाइक वाले नंबर प्लेट को किसी कपड़े या किसी और तरीके से ढंक देते हैं।
क्या हैं।

सजा के प्रावधान-

वाहन के नम्बर प्लेट को छुपाने पर कानूनन जेल की सजा हो सकती है। मोटर व्हीकर एक्ट के मुताबिक गाड़ी का नंबर गलत लिखना, गलत तरीके से नंबर बदलना या उसे छिपाना गैरकानूनी है। इसके आरोपी पर फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज हो सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *