देहरादून। साल 1991 प्रचण्ड राम लहर में भाजपा ने कुमाऊं मण्डल में कुल सात सीटों पर कब्जा जमाया था। अविभाजित उत्तर-प्रदेश के दौर में कुमाऊं मंडल में नौ विस सीटें हुआ करती थीं। तब यूपी में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। साल 1991 में हुए विस चुनाव में राम लहर पर सवार भाजपा ने सर्वाधिक 221 सीटें जीत सरकार बनाई। उस दौर में कुमाऊं की नौ में से सर्वाधिक सात सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। साल 1991 में हुए चुनाव में कुमाऊं की डीडीहाट सीट पर कांग्रेस के लीलाराम वर्मा व हल्द्वानी सीट पर एनडी तिवारी जीत दर्ज कर सके थे।
जबकि पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा से किशन चंद्र, अल्मोड़ा में भाजपा से पूरन शर्मा, बागेश्वर में भाजपा से पूरन चंद्र ने जीत दर्ज की थी। वैसे ही रानीखेत सीट पर भाजपा से बची सिंह रावत, नैनीताल में भाजपा से बंशीधर तिवारी, खटीमा से भाजपा के लाखन सिंह और काशीपुर सीट पर भाजपा के राजीव कुमार जीतकर लखनऊ विस पहुंचे थे। इसके ठीक दो साल बाद हुए 1993 के चुनावों में भाजपा की झोली में सिर्फ चार सीटें ही गई थीं।
